समय कब कहता है – वह सही है?
शिद्दत से सही वक्त ढूँढना पङता है।
कई बार सही समय ढूँढने में
वक्त हीं फिसल जाता है हाथों से।


किताब-ए-ज़िंदगी
का पहला सबक़ सीखा।
रिश्तों को निभाने के लिए,
अपनों की गिलाओ पर ख़ामोशी के
सोने का मुल्लमा चढ़ना अच्छा है।
पर अनमोल सबक़ उसके बाद के
पन्नों पर मिला –
सोने के पानी चढ़ाने से पहले
देखो तो सही…
ज़र्फ़….सहनशीलता तुम्हारी,
कहीं तुम्हें हीं ग़लत इल्ज़ामों के
घेरे में ना खड़ा कर दे.



The pleasure that is in sorrow is sweeter than the pleasure of pleasure itself.
~~Percy Bysshe Shelley
एक बंद दरवाजे को दस्तक देते ,
अंधेरें, एकांत में बैठ,
जीवन को मनन करते
कुछ हंसी कुछ दर्द
कुछ मधुर कुछ दुखद गीत
बन जाती है अनश्वर य़ादें।

कभी-कभी जिंदगी इतनी बदल जाती है कि लगता है, पुराना सब कुछ धुँध और धुएँ में खो गया।
नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री मार्था मेरिडोस की “You Start Dying Slowly कविता के लिए नोबल पुरस्कार मिला था जिस का हिन्दी अनुवाद –
1) आप धीरे-धीरे मरने किधीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
– करते नहीं कोई यात्रा,
– पढ़ते नहीं कोई किताब,
– सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
– करते नहीं किसी की तारीफ़।
2) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, जब आप
– मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
– नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की।
3) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
– बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
– चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
– नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,
– नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या
– आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।
4) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
– नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को, और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें, और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।
5) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप:
– नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
– अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
– अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
– अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की..।
तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं..!!

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