जान पहचान !

किसी को जानना काफ़ी नहीं होता हैं.

जानना है सचमुच में,

तब अच्छाइयों और कमियों के साथ जानो.

जीवन के मोड़ और ऊतार चढ़ाव में पहचानों.

उसके सुख-दुख जानो।

वरना आईना

भी  जानता-पहचानता है.

रोते देख रोता है

 हँसते देख हँसता है.

पर रहता है दूर, दीवार पर हीं है.

बातें, जो बीत गईं !!

कहते हैं जो बीत गई वो बात गई.

उन्हें जाने देना चाहिए !

पर सच तो है कि बहुत सी बीती बातें हीं

ठहर जातीं है बीत जाने पर भी,

जिद्द की तरह !!

बातों का क्या है – कही, अनकही,

कुछ अधूरी, कुछ पूरी. अटकी रहतीं हैं,

घर बना कर ज़ेहन के किसी कोने में.

ज़िन्दगी का हिस्सा बन.

जो बीत गई ,

वो बात रह गई ज़िंदगी का हिस्सा बन कर !!!

ज़िंदगी के रंग – 212

ज़िंदगी में लोंग आते हैं सबक़ बन कर।

फ़र्क़ यह है कि किस का असर कैसा है?

 वे तराश कर जातें या तोड़ कर ?

पर तय है एक बात ,

चोट करने वाले भी टूटा करते हैं।

 हथौडिया छेनियाँ भी टूटा करतीं है।

 

 

 

Image – Aneesh

ज़िंदगी के रंग -211

 

 

 

 

बादलों और धूप को लड़ते देखा ।

रात की ख़ुशबू में,

खुली आँखों और सपनों को झगड़ते देखा।

फ़ूल और झड़ती पंखुड़ियों को,

हवा के झोंकों से ठहरने कहते देखा।

अजीब रुत है।

हर कोई क्यों दूसरे से नाख़ुश है?

पहचान

लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।

चेहरे पहचानना अभी तक नहीं आया।

मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –

मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।

पर मेरा भी यही हाल है।

मनचाहा दिखने के लिए,

लोग रोज़ नये-नये चेहरे बदलते रहते हैं।

सौ चेहरे गढ़,

कभी मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं।

पल-पल रंग बदलते रहते हैं।

चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।

अपने दिल की सुनो,

दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।

गुमान

गुमान में डूबे आसमान में

आफ़ताब के साथ

सितारों को दमकते देखा है .

लेकिन

फलक से टूट सितारों को

गर्दिशों में मिलते भी देखा है.

दख़्लअंदाज़ी

 

 

 

मेरा नाम लिया या आवाज़ें दीं थीं क्या?

कुछ तो सुना था हमने सुदूर से!

सब कहते हैं, हम खोए  रहते हैं अपने आप में,

इसलिये सुनते रहते हैं अनजानी, अनसुनी आवाज़ें।

मालूम है ना ?

इस “अपने-आप” में तुम भी हो,

रोज़ दख़्लअंदाज़ी करते हो।

 

ज़िंदगी के रंग – 210

हाँथों  में खोजते रहे

अरमानों अौ ख़्वाबों की लकीरों को,

और वे लकीरें उभर आईं पेशानी….माथे पर,

अनुभव की सलवटें बन कर।

मेरी कविता संग्रह-किताब के रुप में

“ज़िंदगी के रंग”   my poem book

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इस नाम से, बरसों से मैं कविताएं लिखती आ रही हूँ। मेरे लिये खुशी की बात है कि मुझे अपनी कविताओं को पुस्तक रूप देने का अवसर मिला। इस किताब में मैंने अपनी नई कविताओं के साथ कुछ पुरानी कविताएं भी डाली है। आशा है, आप लोगों को यह कविता संग्रह पसंद आएगी। आप इसे नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ सकते हैं और अगर चाहे, अब आप इसे दिए गए पब्लिकेशन लिंक पर ऑर्डर भी कर सकते हैं। अगर आप में से कोई मेरी इस किताब का रिव्यू करना चाहे तो मुझे बताएं। मुझे इससे बड़ी खुशी होगी।

इस पुस्तक के छपने की यात्रा में मदद के लिए आशीष/ शैंकी, रिव्यू लिखने के लिए स्मिता सहाय पुस्तक के कवर पृष्ठों पर तस्वीरों के लिए चांदनी सहाय की तहे दिल से आभारी हूं।

 

 

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ऐसा भी होता है क्या?