Tag: कविता
बातें, जो बीत गईं !!
कहते हैं जो बीत गई वो बात गई.
उन्हें जाने देना चाहिए !
पर सच तो है कि बहुत सी बीती बातें हीं
ठहर जातीं है बीत जाने पर भी,
जिद्द की तरह !!
बातों का क्या है – कही, अनकही,
कुछ अधूरी, कुछ पूरी. अटकी रहतीं हैं,
घर बना कर ज़ेहन के किसी कोने में.
ज़िन्दगी का हिस्सा बन.
जो बीत गई ,
वो बात रह गई ज़िंदगी का हिस्सा बन कर !!!

ज़िंदगी के रंग – 212
ज़िंदगी में लोंग आते हैं सबक़ बन कर।
फ़र्क़ यह है कि किस का असर कैसा है?
वे तराश कर जातें या तोड़ कर ?
पर तय है एक बात ,
चोट करने वाले भी टूटा करते हैं।
हथौडिया छेनियाँ भी टूटा करतीं है।
Image – Aneesh
ज़िंदगी के रंग -211
पहचान
लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।
चेहरे पहचानना अभी तक नहीं आया।
मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –
मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।
पर मेरा भी यही हाल है।
मनचाहा दिखने के लिए,
लोग रोज़ नये-नये चेहरे बदलते रहते हैं।
सौ चेहरे गढ़,
कभी मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं।
पल-पल रंग बदलते रहते हैं।
चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।
अपने दिल की सुनो,
दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।
गुमान
गुमान में डूबे आसमान में
आफ़ताब के साथ
सितारों को दमकते देखा है .
लेकिन
फलक से टूट सितारों को
गर्दिशों में मिलते भी देखा है.
दख़्लअंदाज़ी
ज़िंदगी के रंग – 210
हाँथों में खोजते रहे
अरमानों अौ ख़्वाबों की लकीरों को,
और वे लकीरें उभर आईं पेशानी….माथे पर,
अनुभव की सलवटें बन कर।
मेरी कविता संग्रह-किताब के रुप में
“ज़िंदगी के रंग” my poem book
इस नाम से, बरसों से मैं कविताएं लिखती आ रही हूँ। मेरे लिये खुशी की बात है कि मुझे अपनी कविताओं को पुस्तक रूप देने का अवसर मिला। इस किताब में मैंने अपनी नई कविताओं के साथ कुछ पुरानी कविताएं भी डाली है। आशा है, आप लोगों को यह कविता संग्रह पसंद आएगी। आप इसे नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ सकते हैं और अगर चाहे, अब आप इसे दिए गए पब्लिकेशन लिंक पर ऑर्डर भी कर सकते हैं। अगर आप में से कोई मेरी इस किताब का रिव्यू करना चाहे तो मुझे बताएं। मुझे इससे बड़ी खुशी होगी।
इस पुस्तक के छपने की यात्रा में मदद के लिए आशीष/ शैंकी, रिव्यू लिखने के लिए स्मिता सहाय पुस्तक के कवर पृष्ठों पर तस्वीरों के लिए चांदनी सहाय की तहे दिल से आभारी हूं।
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