मिथ्यारहित सत्य

मिथ्यारहित सत्य

चाँद को चाँद कह दिया,

ख़फ़ा हो गई दुनिया ।

जब सच का आईना

सामने आया।

सौ-सौ झूठों का

क़ाफ़िला सजा दिया।

ना खुद से ना खुदा से

बोलना सच।

और कहते हैं जीवन का

अंतिम पड़ाव है सच ….

….. मिथ्यारहित सत्य।

रौशनी

रौशनी

सूरज डूबेगा नहीं,

तब निकलेगा कैसे?

चाँद अधूरा नहीं होगा,

तब पूरा कैसे होगा?

अँधेरा नहीं होगा,

तब रौशनी का मोल कैसे होगा?

अमावस नहीं होगा,

तब पूर्णिमा कैसे आएगी।

यही है ज़िंदगी।

इसलिय ग़र चमक कम हो,

रौशनी कम लगे।

बिना डरे इंतज़ार करो।

फिर रौशन होगी ज़िंदगी।

तहरीर

तहरीर

कभी ज़िंदगी की हर

लहर डराती थीं।

लगता था बहा ले जाएँगी

अपनी रवानी में।

एक दिन दरिया

कानों में फुसफुसाया –

मैं तो दरिया हूँ ।

कभी कभी ज़िंदगी

समुंदर लगेगी।

पर डरो नहीं।

ज़िंदगी की तहरीरों….

लिखावट को पढ़ना सीखो लो।

समय पर, अपने आप पर

भरोसा करना सीख लो।

अपने आप से प्यार

करना सीख लो।

मज़बूत बनाना सीख लो।

हर दरिया समुंदर में गिरता है,

सागर दरिया में नहीं।

दरिया की बातें सुन,

ज़िंदगी की दरिया में

तैरना सीख रहें हैं।

अब गोते लगा कर डूबते

नहीं, उभर जातें हैं ।

अब लोग परेशान है –

यह अक्स किस का है?

क्यों इतनी रौशनी है

पानी में ….

इनकी ज़िंदगानी में।

इम्तहान

इम्तिहान

ज़िंदगी क्या तुझे

ख़बर है?

कितनी बार टूट कर

यहाँ पहुँचें है?

तू बस परखते रह,

नए-नए इम्तिहान

लेती जा।

इम्तहान

ज़िंदगी की किताब

ज़िंदगी के किताब

के पुराने पन्ने

कब तक है पढ़ना?

बीते पलों को

बीत जाने दो।

अतीत को

अतीत में रहने दो।

ज़िंदगी में आगे बढ़ो।

नए पन्नों पर कुछ

नया अफ़साना लिखो।

ज़िंदगी की राहें

ज़िंदगी की राहें

मज़बूत दिखने वालों

की सच्चाई यह होती है,

कि वे कई बार टूट

कर बने होते हैं।

ज़िंदगी की राहों पर,

वे अकेला चलना

सीख चुके होतें हैं।

माफ़ी

कहते हैं,

अपने दिल के सुकून

के लिए लोगों को

माफ़ करना अच्छा है।

चाहे वे माफ़ी

माँगे या ना माँगे।

पर ऐसी माफ़ियों से

रिश्ते में कुछ

घटने लगता है –

शायद, विश्वास,

प्यार और अपनापन !!

असली मुस्कुराहटें

ना छुपो अपने आप से,

ना दुनिया से

अपने आप की छुपाओ।

ना ढलो अपने को

बीते कल में…..

या किसी परिभाषा में।

ना रोज़ रोज़ बदलो,

रंग बदलती

दुनिया की तरह।

वरना तुम्हारी असली

मुस्कुराहटें कहीं खो जाएगी।

कभी-कभी It’s ok, not to be ok

कभी कभी ठीक नहीं

होना भी ठीक है।

ज़िंदगी में किसी को खो कर,

या किसी के कड़वाहटों से

कभी कभी मुस्कान

खो देना भी ठीक है।

कभी कभी धोखा खा कर

फिर से भरोसा

ना करना भी ठीक है।

अपनी हर भावना को

जैसे हैं, वैसे हीं

मान लेना ठीक है।

पहेली सी इस ज़िंदगी में,

बस अपने आप पर

भरोसा रखना ठीक है।

टूटने के बजाय हौसला से

आगे बढ़ना ठीक है।

क्योंकि उड़ान भरने

के लिए आसमाँ

और भी है।

मास्टरपीस

मुझ में किसी और

की ना खोज हो।

तुम में किसी

और की ना तलाश हो।

हम हम रहें,

तुम तुम रहो।

दूसरों की ज़िंदगी में अपनी

जगह ना बनाने की

कोशिश हो।

दूसरों को अपनी ज़िंदगी में

समाने की कोशिश ना हो।

किसी के साँचे में ना ढलो।

ना किसी और को

अपने साँचे में ढालो।

तुम तुम रहो, हम हम रहें,

ऊपर वाले ने कुछ

सोंच कर

हीं जतन से हर

मास्टरपीस बनाई होगी।