तन्हाई से मुलाकात

तन्हाई से मुलाकात हुई,

उसने अपनी भीगी पलकों को खोली,

…..बोली

मैं भी अकेली …..

क्या हम साथ  समय

बिता सकते हैं?

हम नें कहा – हाँ जरुर …..

अकेलेपन अौर पीङा से

गुजर कर हीं कला निखरती है।

जीने की कला   Art of living 

सम्बन्धों को बनाये रखना ,

 ईमानदारी से रिश्ते निभाये रखना ,

जीवन जीने की कला है। 

वरना …..

टूटते रिश्ते , बिखरते लोगों को देखा है ,

आसमान के आँसुओं को ओस  बन कर टपकते देखा है ।