अगर तुमने ही ख़बर नहीं तुम्हारी.
तब किसे फिक्र होगी ?
बहते आँसुओं को कौन आता है पहले पोंछने ?
क्या पहले अपनी ही उंगलियां…..
उलटी हथेली नहीं उठती ?
अनजाने में, अपने आप ?
गालों पर बह आए
आँखों को धुँधला कर गए ,
अश्रुओं को हटाने?
करो……..
फ़िक्र करो अपनी .
अपना ख़्याल….अपनी क़द्र करो ,
सिर्फ़ सहानुभूति मत बटोरो ,
तभी लोग भी क़द्र करेंगे !!!












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