ज़िंदगी के रंग – 160

जीने की चाहत में

ना जाने हम क्या क्या करते हैं.

क्यों हम सब मौत से

इतना डरते हैं ?

और अगर डरते हैं ,

लालसा है हमेंशा जीने की तो,

यादों में जीने के लिए

क्यों नहीं कुछ अच्छा करते हैं?

17 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 160”

  1. अगर मैं इसका जवाब संक्षिप्त में कहूँ तो मुझे लगता है कि जीवों का यही मुख्य उधेश्य है कि वे अपने जीवन के लिए भोजन के लिए लड़े।

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      1. ये पंक्ति और भी खुबसूरत लगेगी, अगर वास्तव में ऐसा हो। पर समस्या समाधान का कभी पीछा नहीं छोड़ती।

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