When you reach
the bottom of
the well of your
own nature,
then you will know
that the vileness
was from yourself.

Rumi ❤️
When you reach
the bottom of
the well of your
own nature,
then you will know
that the vileness
was from yourself.

Rumi ❤️
The aim of Positive Psychology is to catalyze a change in psychology from a preoccupation only with repairing the worst things in life to also building the best qualities in life.

– Martin Seligman

बर्बरता और क्रूरता की इंतिहा हो गई .
किसी की आँखों का मोल नहीं है
किसी के जीवन का मूल्य नहीं .
मासूमियत भी नज़र नहीं आई .
है अनमोल सिर्फ़ अपनी दुश्मनी, 5 हज़ार
रुपये और अपनी हैवानियत !!!
ज़िंदगी भी कुछ अजीब अजीब सी है।
रोज़ नए रंग दिखाती है।
कल्पना को हक़ीक़त बनते बहुत बार देखा होगा।
हमने तो हक़ीक़त को कल्पना कहते भी सुना है !!



पृथ्वी को हमने डस्टबीन बना दिया ,
दिल नहीं भरा है तब सागर की ओर मुड़ गए .
फिर भी तसल्ली नहीं हुई तो
एवरेस्ट का भी यह हाल कर दिया .
हद है स्वार्थ परस्ता और नासमझी की.
अगर तुमने ही ख़बर नहीं तुम्हारी.
तब किसे फिक्र होगी ?
बहते आँसुओं को कौन आता है पहले पोंछने ?
क्या पहले अपनी ही उंगलियां…..
उलटी हथेली नहीं उठती ?
अनजाने में, अपने आप ?
गालों पर बह आए
आँखों को धुँधला कर गए ,
अश्रुओं को हटाने?
करो……..
फ़िक्र करो अपनी .
अपना ख़्याल….अपनी क़द्र करो ,
सिर्फ़ सहानुभूति मत बटोरो ,
तभी लोग भी क़द्र करेंगे !!!


The highest and
most beautiful things
in life are not to
be heard about,
nor read about,
nor seen but,
if one will,
are to be lived.

– Søren Aabye Kierkegaard 💕
यह भी ख़ूब रही !!!
असम पुलिस की दिल्लगी की
यह अदा भी लाजवाब रही.
इस “खोया पाया” ख़बर को पाकर
अपराधी ‘कभी खुशी कभी ग़म’
मना रहे होंगे, या बिलों में छुपे होंगे?
इस इनोवेटिव , मज़ेदार विचार के लिए
असम पुलिस को सलाम !!!!

जीने की चाहत में
ना जाने हम क्या क्या करते हैं.
क्यों हम सब मौत से
इतना डरते हैं ?
और अगर डरते हैं ,
लालसा है हमेंशा जीने की तो,
यादों में जीने के लिए
क्यों नहीं कुछ अच्छा करते हैं?

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