ज़िंदगी के रंग- 199

ज़िंदगी की परेशान घड़ियों में अचानक

किसी की बेहद सरल और सुलझी बातें

गहरी समझ और सुकून दे जातीं हैं, मलहम की तरह।

किसी ने हमसे कहा – किसी से कुछ ना कहो, किसी की ना सुनो !

दिल से निकलने वाली बातें सुनो,

और अपने दिल की करो।

गौर से सुना,  पाया……

दिल के धड़कन की संगीत सबसे मधुर अौर सच्ची है।

 

कायनात और कोरोना

हम सब न जाने कब से धरा, प्रकृति और उसकी व्यवस्था को अस्वीकार कर रहें हैं. उससे खिलवाड़ कर रहें हैं. हम कायनात या इस दुनिया के नियम व तालमेल को रोज़ तोड़ते और भंग करते हैं। धरा, जल, सागर, आकाश, अंतरिक्ष को कचरा से भरते जा रहें हैं.

कभी हम सब ने सोंच नहीं कि प्रकृती हमें रिजेक्ट या अस्वीकार कर दें. तब क्या होगा? आज वही हो रहा है. शायद इस धरा को मानव के अति ने बाध्य कर दिया है. वह अपना राग, नाराज़गी दिखा रही है. कहीं मानव भी विलुप्त ना हो जाए मैमथ, डोडो, डायनासोर की तरह या विलुप्त निएंडरथल – विलुप्त मानव प्रजातियों की तरह. प्रकृति के इस इशारे को संकेत या चेतावनी मान लेने का समय आ गया है. प्रकृति और मानव का सही सामंजस्य अनमोल है. यह समझना ज़रूरी है.

 

ज़िंदगी के रंग – 198

दुनिया में सुख हीं सुख हो,

सिर्फ़ शांति हीं शांति और ख़ुशियाँ हो.

ऐसा ख़ुशियों का जहाँ ना खोजो.

वरना भटकते रह जाओगे.

जीवन और संसार ऐसा नहीं.

कष्ट, कोलाहल, कठिनाइयों से सीख,

शांत रह कर जीना हीं ख़ुशियों भरा जीवन है……

नमस्ते

आज कोरोना संक्रमण की वजह से सारी दुनिया में अभिवादन के लिए नमस्ते सब से उपयुक्त अभिवादन माना जा रहा है. नमस्ते का अर्थ और भाव क्या है, यह हम सबों को जानना चाहिए.

नमस्ते या नमस्कार मुख्यतः हिन्दुओं और भारतीयों द्वारा एक दूसरे से मिलने पर अभिवादन और विनम्रता प्रदर्शित करने हेतु प्रयुक्त शब्द है। इस भाव का अर्थ है कि सभी मनुष्यों के हृदय में एक दैवीय चेतना और प्रकाश है जो अनाहत चक्र (हृदय चक्र) में स्थित है। यह शब्द संस्कृत के नमस शब्द से निकला है। इस भावमुद्रा का अर्थ है एक आत्मा का दूसरी आत्मा से आभार प्रकट करना। दैनन्दिन जीवन में नमस्ते शब्द का प्रयोग किसी से मिलने हैं या विदा लेते समय शुभकामनाएं प्रदर्शित करने या अभिवादन करने हेतु किया जाता है। नमस्ते के अतिरिक्त नमस्कार और प्रणाम शब्द का प्रयोग करते हैं।फायदा.. जब आप हाथ जोड़कर नमस्ते करते हैं तो उस वक्त हथेलियों को दबाने से या जोड़े रखने से हृदयचक्र और आज्ञाचक्र में सक्रियता आती है जिससे जागरण बढ़ता है, आप का मन शांत हो जाता है जिसकी वजह से खुद ब खुद आप के चेहरे पर हंसी आ जाती है।मनोवैज्ञानिक तरीका जब इंसान को बहुत गुस्सा आये तो उसे तुरंत लोगों को नमस्कार कर देना चाहिए क्योंकि नमस्कार करने पर आपके दोनों हाथ जुड़ जाते हैं तो आप गुस्सा नहीं कर पाते हैं। और आपको यूं देखकर सामने वाले का भी गु्स्सा शांत हो जाता है।अनाहत चक नमस्ते करने के लिए, दोनो हाथों को अनाहत चक पर रखा जाता है, आँखें बंद की जाती हैं और सिर को झुकाया जाता है।

हाथ ह्रदय के पास।

शारीरिक सुरक्षा – जब भी आप किसी से हाथ मिलाने की जगह नमस्कार करते हैं तो आप अपने को सामने वाले के किसी भी शारीरिक संक्रमण से भी सुरक्षित रखते हैं।

Credit- https://hi.m.wikipedia.org/wiki/नमस्ते

ज़िंदगी के रंग – 197

जीवन के संघर्ष हमें रुलातें हैं ज़रूर,

लेकिन दृढ़ और मज़बूत बनातें हैं.

तट के पत्थरों और रेत पर

सर पटकती लहरें बिखर जातीं हैं ज़रूर.

पर फिर दुगने उत्साह….साहस के साथ

नई ताक़त से फिर वापस आतीं हैं,

नई लहरें बन कर, किनारे पर अपनी छाप छोड़ने.

ख़ुशियाँ

आँखों में झलकती ख़ुशियाँ, होंठों पर थिरकती-बहती ख़ुशियाँ !!! जहाँ मिले ख़ुशियों का ख़ज़ाना, बटोर लो अपने अरमानों के गुल्लक में.

अहंकार या अस्तित्व?

हर चर्चा, हर बात में ज़िक्र ‘मैं’ की दिखाता है अहंकार. पर ‘मैं’ या अपने वजूद की खोज, आध्यात्मिक खोज है- स्वयं की, अपने अस्तित्व की. हमें क्या जानना है जीवन समर में? हमें क्या सिद्ध करना है? अपना अहंकार या अपना अस्तित्व? इसे समझने के लिए अच्छा है, एक बार झाँक लेना अपने अंदर.

Let go of your worries

Let go of your worries

and be completely clear-hearted,

like the face of a mirror

that contains no images.

If you want a clear mirror,

behold yourself

and see the shameless truth,

which the mirror reflects.

If metal can be polished

to a mirror-like finish,

what polishing might the mirror

of the heart require?

Between the mirror and the heart

is this single difference:

the heart conceals secrets,

while the mirror does not.

– The Divani Shamsi Tabriz, XIII

A moment of happiness

A moment of happiness,

you and I sitting on the verandah,

apparently two, but one in soul, you and I.

We feel the flowing water of life here,

you and I, with the garden’s beauty

and the birds singing.

The stars will be watching us,

and we will show them

what it is to be a thin crescent moon.

You and I unselfed, will be together,

indifferent to idle speculation, you and I.

The parrots of heaven will be cracking sugar

as we laugh together, you and I.

In one form upon this earth,

and in another form in a timeless sweet land.

Rumi ❤

Kulliyat-e Shams, 2114

Love is the Water of Life

Love is the Water of Life

Everything other than love for the most beautiful God

though it be sugar- eating.

What is agony of the spirit?

To advance toward death without seizing

hold of the Water of Life.

Rumi ❤

Masnawi I 3686-87