Positive Psychology- हाइवे हिप्नोसिस, Freeway/ Highway/ Road hypnosis /white-line fever

हाइवे हिप्नोसिस एक मानसिक स्थिति है। जिसमें ड्राइवर तकनीकी रूप से जागा होता है। पर ऑटोपायलट जैसा काम कर रहा होता है और पूरी तरह से सतर्क नहीं होता। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह नींद की कमी, लंबी और उबाऊ सड़कों के कारण हो सकता है। ऐसी हालत में व्यक्ति बड़ी दूरी तक ड्राइव कर सकता है। पर उस समय की बातें ठीक से याद नहीं रहतीं। ड्राइव करने वाले के मन में कुछ और बातें चलती रहतीं है। ड्राइव करनेवाले महसूस करते है जैस -नींद आ रही हो, कॉन्संट्रेट नही है। ध्यान भटकना, बातें देर से समझना, पलकें बार-बार झपकाना, आंखों की पलकें भारी महसूस होना अन्य पहचान हैं।

उपाय – ड्राइविंग से ब्रेक लें, खुली हवा में थोड़ा टहलें, ड्राइविंग के समय नींद पूरी हो, चाय- कॉफ़ी पियें, हल्के-फुल्के हेल्दी स्नैक्स लें, बातें करें, आई मूवमेंट रखें, रियर-व्यू और साइड मिरर देखते रहें, गाड़ी की गति नियंत्रित रखें।

Highway hypnosis is a mental state in which Driver might be technically awake and operating on autopilot, but less than fully alert, so it could have serious consequences. It may happen due to lack of sleep, long and boring roads. The phenomenon is an example of cognitive psychologist would call automaticity. The person can drive an automobile great distances, responding to external events in the expected manner, with no recollection of having consciously done so. In this state the driver’s conscious mind is apparently fully focused elsewhere.

Some warning signs- sleepiness, loss of concentration or mental fogginess, wandering thoughts, a dull or dazed feeling, slow reaction time, heavy eyelids or frequent blinking। Prevention -Take a break, Have some caffeine, Talk or sing, stop driving for few minutes and take a walk, breath fresh air. have light food, Get enough sleep,

Highway Hypnosis

Courtesy- https://psychology.fandom.com/wiki/Highway_hypnosis

हमारे संस्कार ! Memories’ pass between generations

मृत्यु से परे हैं संस्कार हमारे।
साथ-साथ जन्मों तक जातें हैं।
बताती रही हमारी आध्यात्मिकता ।
कुछ ने माना, कुछ ने नाकारा।
अब सब वापस आ रहें हैं वहीं,
मानने उस ज्ञान को, जो हमें विरासत में मिली है।
यादें कई पुश्तों तक साथ जातीं हैं
फोबिया हों या अवसाद और
आदतों में शामिल हो संस्कार बन जातीं हैं।
अब सब यह मानने के लिए बाध्य हैं।
क्योंकि पश्चिमी शोधों ने इसे मान लिया है।
क्या ग़ज़ब विडम्बना है हमारी।

(Memories pass between generations, says scientists- BBC)

Behaviour can be affected by events in previous generations which have been passed on through a form of genetic memory, animal studies suggest. Experiments showed that a traumatic event could affect the DNA in sperm and alter the brains and behaviour of subsequent generations. A Nature Neuroscience study shows mice trained to avoid a smell passed their aversion on to their “grandchildren”. Experts said the results were important for phobia and anxiety research.

Courtesy – Memories pass between generations- https://www.bbc.com/news/health-25156510.amp

हौसला

रफ़ू रिश्ते

ग़र किसी ने दूरियाँ बना ली,

गिला करने से पहले,

झाँक कर देखो गिरेबान में अपने।

कितनी बार रिश्तों के

फटे गिरेबाँ रफ़ूगर करे रफ़ू?

थक कर समझ गया,

बेहतर है अपनी

राह-ए-मंज़िल पर बढ़ जाना।

बसंती बयार

चराग़

नववर्ष , नये संवत्सर 2079 (2 अप्रैल) और राम नवमी की शुभकामनाएँ!

नववर्ष या नया संवत्सर 2079, (2 अप्रैल) और रामनवमी की शुभकामनाएँ मान्यता है वासंती नवरात्र, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सर्वोत्तम तिथि मान सृष्टि रचा। इसे सृष्टि निर्मिति का प्रथम दिवस और प्रथम वर्ष माना। आज विक्रम संवत् 2079 वर्ष है। राम का राज्याभिषेक बसंत के इसी पावन प्रथम दिवस को हुआ। प्राचीनतम चंद्र कैलेंडर भारत में संस्कृत में बना, ब्रह्माण्ड में सूर्य और चंद्रमा की गति पर।ब्रिटिश साम्राज्य के किंग जॉर्ज ने बिना किसी तार्किक आधार, नववर्ष अपने जन्म माह में शुरू किया। अब नव वर्ष कब मनायें, स्वयं तय करना है। नव वर्ष और राम नवमी की शुभकामनाएं।

Happy new year!

गुमान

रक़्क़ासा

रक़्क़ासा, नगर वधू, नृत्यांगना कुछ भी बुला लो।

नारी का यह बाज़ार सजता है क्योंकि ख़रीदार है।

वरना नारी तो ईश्वर की सर्वोत्तम, पावन रचना है।

इतिहास गवाह है, वैशाली की राजनृत्यांगना

आम्रपाली, जिसके सौंदर्य पर मुग्ध थी दुनिया सारी,

भिक्षुणी बन त्याग दिया वैभव और दौलत।

रक़्क़ासा आम्रपाली की श्रद्धा, भक्ति, विरक्ति देख,

बुद्ध ने तोड़ दिया परम्परा धम्मसंघ में भिक्षुणियाँ

को नहीं शामिल करने की।

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कभी-कभी कुछ रिश्ते

कभी-कभी कुछ रिश्तों को

एक तरफ़ा चलाने को कोशिशें रोक दें,

तब वे रिश्ते मरने लगें।

कभी-कभी देखा है ,

कुछ बेज़ान रिश्ते ढोने से वे जी नहीं जाते।

दरअसल वे रिश्ते होते हीं नहीं।

ऐसे एक तरफ़ा रिश्ते को छोड़

आगे बढ़ जाना समझदारी है।

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