ख़ुद को ख़ुद से

कुछ उलझा उलझा ,

कुछ रूठा रूठा सा है वजूद अपना

ख़ुद को ख़ुद से याद करूँ कैसे ?

करना है ख़ुद को ख़ुद से आज़ाद .

करुँ कैसे ?

बड़ा उलझा प्रश्न है.

कभी कभी उठने वाली कसक,

मन की दर्द , पीड़ा , विरह

किसी को समझाऊँ कैसे ?

अपने से, अपने रूह से बात करूँ कैसे ?

मेहंदी के रंग से लम्हे

जो सिर्फ़ अपनी ख़ुशबू छोड़ गए, काश़ वे लम्हें

मेहंदी के रंगों की तरह हथेलियों में रच बस जाते.

Australia to bring children of dead Islamic State fighters home from Syria

यह महानता है आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की .

पर जिनहें पनाह दिया गया ,

उसकी भी ज़िम्मेदारी है .

आस्ट्रेलियन रहनुमा को

सही साबित करने की.

SYDNEY (Reuters) – Australia has gathered up eight children and grandchildren of two dead Australian Islamic State fighters from a Syrian refugee camp and will bring them home, Prime Minister Scott Morrison said on Monday.

https://www.reuters.com/article/us-australia-refugees-syria/australia-rescues-children-of-dead-islamic-state-fighters-from-syria-idUSKCN1TP0WD?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts

Metamorphosis

Pakistani blogger and journalist known for criticising army hacked to death

एक नौजवान लेखक के कलम में ऐसी

क्या ताक़त थी कि कुछ लोगों

में इतना डर भर गया ?

क्यों कहते हैं कलम आज़ाद होती है .

यह दुर्घटना है या लिखने की सज़ा?

https://www.thehindu.com/

https://www.google.co.in/amp/s/www.thehindu.com/news/international/pakistani-blogger-and-journalist-known-for-criticising-army-hacked-to-death/article27994750.ece/amp/

तुम हो कहीं !!

श्रद्धांजलि Tribute to my husband.
We donated his eyes. I know He is still somewhere, watching this beautiful world.

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जब देखा तुम्हें

शांत, नींद में डूबी आँखें

शीतल चेहरा …..

चले गए ऐसा तो लगा नहीं.

वह पल, वह समय, वह दिन ….

ज़िंदगी के कैलेंडर का असहनीय दिन बन गया .

उस दिन लगा –

ऐसा क्या करूँ कि तुम ना जाओ?

कुछ तो उपाय होगा रोकने का.

रोके रखने का, लौटाने का ……

कुछ समझ नहीं आ रहा था.

कुछ भी नहीं ….

पर इतना पता था –

रोकना है, बस रोकना है .

तुम्हें जाने से रोकना है .

और रोक भी लिया ………

अब किसी भी अजनबी से मिलती हूँ

तब उसकी आँखों में देखतीं हूँ ….

कुछ जाना पहचाना खोजने की कोशिश में .

कहीं तुम तो नहीं …….

शायद किसी दिन कहीं तुम्हें देख लूँ.

किसी की आँखों में जीता जागता .

बस दिल को यही तस्सली है ,

तुम हो, कहीं तो हो, मालूम नहीं कहाँ ?

पर कहीं, किसी की आँखों में.

हमारी इसी दुनिया में.

 या क्षितिज के उस पार ………?

श्रद्धा सुमन हैं ये अश्रु बिंदु

जो लिखते वक़्त आँखों से टपक

इन पंक्तियों को गीला कर गए .

 

Minor’s eyes gouged out, hands crushed over Rs 5,000-loan dispute in Aligarh

बर्बरता और क्रूरता की इंतिहा हो गई .

किसी की आँखों का मोल नहीं है

किसी के जीवन का मूल्य नहीं .

मासूमियत भी नज़र नहीं आई .

है अनमोल सिर्फ़ अपनी दुश्मनी, 5 हज़ार

रुपये और अपनी हैवानियत !!!

https://www.google.co.in/amp/s/www.indiatoday.in/amp/crime/story/crime-uttar-pradesh-aligarh-minor-girl-brutal-murder-1543753-2019-06-06

11,000 kg garbage, four dead bodies removed from Mt Everest in two-month long cleanliness drive

पृथ्वी को हमने डस्टबीन बना दिया ,

दिल नहीं भरा है तब सागर की ओर मुड़ गए .

फिर भी तसल्ली नहीं हुई तो

एवरेस्ट का भी यह हाल कर दिया .

हद है स्वार्थ परस्ता और नासमझी की.

https://www.google.co.in/amp/s/www.indiatoday.in/amp/world/story/11-000-kg-garbage-four-dead-bodies-removed-from-mt-everest-in-two-month-long-cleanliness-drive-1543470-2019-06-06

Assam Police finds 590kg ganja, wins Internet with crazy tweet: Don’t panic, we found it

 

 

 

यह भी ख़ूब रही !!!

असम पुलिस की दिल्लगी की

यह अदा भी लाजवाब रही.

इस “खोया पाया” ख़बर को पाकर

अपराधी ‘कभी खुशी कभी ग़म’

मना रहे होंगे, या बिलों में छुपे होंगे?

इस इनोवेटिव , मज़ेदार विचार के लिए

असम पुलिस को सलाम !!!!

https://www.google.co.in/amp/s/www.indiatoday.in/amp/trending-news/story/-assam-police-finds-590kg-ganja-wins-internet-with-crazy-tweet-don-t-panic-we-found-it-1543079-2019-06-05

आँसू

इन आँसुओं से एक  बात पूछनी है।

इतना नमक कहाँ से ढूँढ लाते हो?

कहाँ से बार बार चले आते हो?

रुक क्यों नहीं जाते ?

बातें क्यों नहीं सुनते  ?

जब देखो आँखें धुँधली कर जाते हो।