दूसरों को अपने ऊपर हावी ना होने दें- गैसलाइटिंग प्रभाव-2 #मनोविज्ञान, Gaslighting #Psychology

 यह एक प्रकार के ब्रेनवॉश का तरीका  है।, मूवी गैसलाइट (1 9 44) में, एक आदमी गैसलाइटिंग प्रभाव से अपनी पत्नी की ऐसी मनःस्थिती बना देता है, जब वह सोचने लगती है कि वह अपना दिमागी संतुलन खो रही है। इस शब्द की उत्पत्ति, 1 9 38 के एक नाटक और 1 9 44 के उपरोक्त फिल्म से हुई है।

हावी होने वालों के  तकनीक — 

गैसलाइटर को पहचानना अौर अपनी सुरक्षा करना जरुरी है। ये घटनाएं अभद्र भी हो सकती हैं ,ज्यादा भ्रमित करने के इरादे से दुर्व्यवहार अपमानजनक व्यवहार भी किये जाते हैं।  आमतौर पर इस तकनीकों का उपयोग दूसरों पर करते हैं :

*  वे ज़बरदस्त झूठ बङी सफाई से बोलते हैं, यह दूसरों को अस्थिर  करने के लिये करते हैं।

*   झूठ पकङाने पर भी इनकार करते हैं, भले ही आपके पास प्रमाण हो।

*  वे आपके प्रिय लोगों या प्रिय बातों का उपयोग परेशान करने के लिये करते हैं। जैसे वे जानते आपके बच्चे/ दोस्त आपके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, और वे जानते हैं कि आपकी पहचान कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए ये उन पहली चीजों में से किसी एक पर  वे हमला करते हैं। वे आपके अस्तित्व की नींव पर हमला करते हैं।

* वे समय के साथ धीरे-धीरे आपकी जङें खोदते हैं। यह गैसलाईटर की खतरनाक बातों में से एक है- यह समय के साथ धीरे-धीरे किया जाता है। एक झूठ है, फिर दूसरा झूठ है, हर बार धोखेवाली टिप्पणी करते रहते है  और फिर यह बढ़ना शुरू हो जाता है। यहां तक ​​कि सबसे प्रतिभाशाली, सबसे अधिक आत्म-जागृत , समझदार लोगों को गैसलाईटिंग से चूसा जा सकता है- यह इतना प्रभावी है, कि उस व्यक्ति को यह नहीं पता चलता कि उसके साथ क्या हो रहा है।

* गैसलाइटर के कार्य उनके शब्दों से मेल नहीं खाते हैं।  ऐसे व्यक्ति पर ध्यान दें कि वे क्या कर रहे हैं इसके बजाय वे क्या कह रहे हैं। वे क्या कह रहे हैं उसका कुछ अर्थ नहीं; यह सिर्फ बातें बना रहे होते है। वे क्या कर रहे हैं यह समस्या पैदा करता है

*  वे आपको भ्रमित करने के लिए साकारात्मक व्यवहार करते हैं।  यह व्यक्ति जो आपकी जङ काट रहा है, आपको बता रहा था कि आपका कोई मूल्य नहीं है। अब, जब वे आप की प्रशंसा कर रहा हैं। आप सोचते हैं, “ठीक है, ये इतने बुरे नहीं हैं। पर यह आपको परेशान करने की एक चालाकी भरा उपाय है। ध्यान दें, किस बात के लिये आपकी प्रशंसा की गई थी; शायद इससे वह आपको कुछ क्षति पँहुचाना चाह रहा है।

*  वे जानते हैं कि भ्रम की स्थिति लोगों को कमजोर करती है, उसका फायदा उठाते हैं।  ऐसे लोग जानते हैं कि सब लोग जीवन में स्थिरता चाहते हैं और जीवन सामान्य रुप से जीना चाहते हैं। उनका लक्ष्य होता है आपके जीवन की इस सामान्यता व स्थिरता को उखाड़ फेंकना। जिससे आप लगातार संशय के प्रश्नात्मक हालात में रहें। इंसान की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है ऐसे व्यक्ति की अोर झुकना जो स्थिर स्थिती महसूस कराने में मदद करे – और गैसलाइटर हीं आपकी मदद करने वाला व्यक्ति बन आपको धोखा देता है।

*  वे दिखावा करते हैं अौर हावी होते हैं। अगर वे नशीली दवाओं के उपयोगकरते हैं या धोखेबाज हैं, फिर भी वे आप पर लगातार आरोप लगाते रहेगें। ऐसे में अक्सर आप खुद का बचाव करने की कोशिश शुरू करेगें, और गैसलाइटर के व्यवहार से विचलित हो जायेगें।

*  वे लोगों को आपके विरुद्ध करने की कोशिश करते हैं।  गैसलाइटर हेरफेर करने में मास्टर होते हैं और कुछ लोगों को अपनी तरफ कर लेतें हैं – और वे इन लोगों को आपके खिलाफ इस्तेमाल करते हैं। वे ऐसी टिप्पणी करेंगे जैसे “यह व्यक्ति जानता है कि आप सही नहीं हैं” या “यह व्यक्ति जानता है कि आप बेकार हैं।” ध्यान रखें कि इसका मतलब यह नहीं है कि इन लोगों ने वास्तव में इन बातों को कहा है। एक गैसलाइटर निरंतर झूठ बोलता है। जब गैसलाईटर इस रणनीति का उपयोग करते है तब आप यह समझ नहीं पाते है कि आपको किस पर भरोसा करना या नहीं करना है – और यह आपको गैसलाईटर के पास ले जाता है और वह वास्तव में यही चाहते हैं: अलगाव उन्हें अधिक नियंत्रण प्रदान करता है

*  वे आपको या दूसरों को बताते हैं कि आप पागल हैं। यह गैसलाइटर के सबसे प्रभावी उपकरणों में से एक है, गैसलाइटर जानता है कि ऐसे में लोग तब आपका विश्वास नहीं करेंगे जब आप उन्हें बता दें कि गैसलाइटर अपमानजनक है या आउट-ऑफ-कंट्रोल है। यह एक मास्टर तकनीक है।

*  वे आपको बताते हैं कि हर कोई झूठा  है  सिवाय उनके । इस से आप को  दुविधा होगी कि आप को किस पर विश्वास करना चाहिये। कौन सच कह रहा है ?  यह भी एक हेरफेर तकनीक है। ऐसे में लोग “सही” सूचना के लिए गैसलाइटर की ओर मुड़ते हैं- जो फिर धोखा  देते  है।

जितना अधिक अधिक इन तकनीकों के बारे में समझते हैं, उतनी जल्दी आप उन्हें पहचान सकते हैं और गैसलाईटिंग  से बच सकते हैं।

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दूसरों को अपने ऊपर हावी ना होने दें- गैसलाइटिंग प्रभाव-1 #मनोविज्ञान, Gaslighting #Psychology

Gaslighting is a form of manipulation that seeks to sow seeds of doubt in a targeted individual or members of a group, hoping to make targets question their own memory, perception, and sanity.

गैसलाइटिंग प्रभाव क्या है –
यह एक गलत अौर नाकारात्मक व्यवहार है। कुछ लोग दूसरे के दिल अौर दिमाग पर हावी हो कर, उन्हें अपने तरीके से चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे करीबी लोग हीं करते हैं। अगर लोगों के व्यवहार पर गौर करेंगें, तब आप अपने आसपास ऐसे लोगों को आसानी से पहचान सकते हैं। इसका प्रभावित व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बुरा असर पङता है।

गैसलाइटिंग, हेराफेरी कर किसी को अपने तरीके से चलाने का तरीका है । ऐसे लोग लक्षित व्यक्ति या किसी समूह के लोगों में मन में संदेह के बीज बोने की कोशिश करतें हैं। लक्ष्य किये गये व्यक्ति की बातों को गलत ठहरने की कोशिश करते रहते हैं। उनके सामने उनकी याददाश्त, धारणा और विवेक पर सवाल उठाते रहते है। उनकी बातों को निरंतर अस्वीकार करना, गलत तरह से उसकी व्याख्या करना, विरोधाभास पैदा करना और झूठा ठहराना सामान्य तरीका हैं। अन्य लोगों के सामने भी उसके बारे में गलत बातें अौर धारणायें देते रहते हैं। ये सब बातें उस व्यक्ति को भ्रमित , अस्थिर व परेशान करता है और उसके आत्मविश्वास को तोङता हैं।

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Writer’s block

Writer’s block

Writing is an emotional  process along with  creativity.  While writing , Sometimes we feel stuck. This is a common problem. Every writer faces writer’s block at some point of time. This is a  condition of being unable to think of what to write or how to proceed with writing?

How to Deal With writers’ Block-

  1. Make a habit of reading and  writing in a disciplined way.

2.  Always take  break.

3. Practice writing.

4. If possible, try ‘free writing’ practice.

5. If there is self-doubt or dilemma at the time of writing, consult a writer or friend    who may guide you.

 

 

 

फ्री राईटिंग अभ्यास Free Writing Practice

एक ‘फ्री राईटिंग’ अभ्यास (CHARMAZ, 2006 )
यदि आप लेखक ब्लॉक से प्रभावित हो रहे हैं या अपने विचारों के साथ संघर्ष कर रहे हैं,  या लेखन सीखना चाहते हैं, तब इन दिशानिर्देशों का पालन करते  सकते हैं। यह काम हर दिन किसी एक हीं समय पर  किया जाय , तब इसका ज्यादा लाभ होगा।

1. दस मिनट के लिए जो कुछ भी दिमाग आता है  उसे लिखें
2. खुद के लिए लिखें ( पढ़नेवालों के लिए नहीं लिखें);
3. इस समय व्याकरण, वाक्य संरचना और संगठन के बारे में चिंता नहीं करें;
4. अपने आप को कुछ भी लिखने की अनुमति दें;
5. जितनी जल्दी हो सके लिखें;
6.   ऐसे लिखें जैसे आप बात कर रहे हैं (अपने आप से)।

लेखक ब्लॉक- क्या लिखें ?? कैसे लिखें?? writer’s block

 

 

लेखक ब्लॉक

 लेखन रचनात्मकता के साथ-साथ एक भावनात्मक प्रक्रिया है। जो बहुत सी भावनाओं को जगाता अौर हमें उन में  उलझाता है। लिखते की कोशिश में , कभी-कभी हम अटक जाते हैं।   क्या लिखना है या कैसे आगे बढ़ना है?  इसके बारे में सोचने में असमर्थ होने लगते  है। यह एक आम समस्या है । इस लेखन  ब्लॉक का सामना प्रत्येक लेखक, लेखिका कभी ना कभी  करते हैं।

लेखक ब्लॉक से कैसे निपटें

  1. जो पसंद आए पढ़ें अौर  अनुशासनपुर्ण लिखने की आदत बनाये।

2.   ब्रेक जरुर लें।

3. लिखने का अभ्यास करें।

4.  हो सके तो ‘फ्री राईटिंग’ अभ्यास जरुर करें।

5. लिखने के समय  आत्म-संदेह या दुविधा होने पर किसी   लेखक या मित्र से सलाह लें जो आपका उचित मार्गदर्शन करे।

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The spotlight effect #Psychology

The Spotlight Effect: It is a phenomenon, which explains that  generally people believe that they are being noticed by others more than they really are. this is because everyone is busy with all their attention focussed on themselves. 

The spotlight effect is a tendency for individuals to think that others are observing them more closely than they actually are. This is more prominent during failures, when one  is in an embarrassing situation or when one has some guilt. Higher level of the spotlight effect may cause – nervousness,  social anxiety, negative self evaluation etc.

Solution –  whenever you feel others are  noticing you, keep your calm and tell yourself that everyone else is actually  more concerned with their own behavior and are in-fact  worrying you’re paying close attention to them. So you should be confident of yourself and not get spotlighted in any situation.  

स्पॉटलाइट प्रभाव: आम तौर पर, ज्यादातर लोगो में  यह एहसास   पाया जाता है, जो उनके व्यवहार पर असर ङालती है ।  लोग यह महसूस करते है कि अन्य लोग मुझे / हमें देख रहे हैं  अौर बहुत अधिक बारीकी से देख रहे हैं। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता हैं, क्योंकि स्पॉटलाइट इफेक्ट की वजह से  वे स्वयं पर अधिक ध्यान दे रहे होते हैं। आम तौर पर लोग  दूसरों द्वारा जितना देखे जाते  हैं उससे अधिक महसूस करते हैं।  विशेष कर  शर्मनाक स्थितियों में,  गलतियों, विफलताओं के दौरान स्पॉटलाइट प्रभाव  का स्तर  ज्यादा  हो सकता है। इससे व्यवहार में घबराहट, सामाजिक चिंता, नकारात्मक मूल्यांकन आदि बढ़ जाता है।

समाधान – जब आपको  ऐसा लगे कि, हर कोई आप पर  ध्यान दे रहा है , तब  आप इस बात को समझें: कि अन्य सभी लोग वास्तव में अपने लिये  चिंतित हैं और उन्हें  लग रहा है कि आप उन पर ध्यान दे रहे हैं। इस लिये  बेहतर  है कि  आत्मविश्वास  बनाये रखें और स्पॉटलाइट प्रभाव को हावी ना होने  दें।

बर्न-आउट (एक मनोवैज्ञानिक समस्या)Burn out

Burnout is a state of emotional, mental, and physical exhaustion caused by excessive and prolonged stress. It occurs when you feel overwhelmed, emotionally drained, and unable to meet constant demands.

बर्न-आउट क्या है ?

ज़िंदगी की भागम-भाग, तनाव, काम की अधिकता अक्सर हमे शारीरिक और मानसिक रूप से थका देती है। जब यह थकान और परेशानी काफी ऊंचे स्तर तक चला जाता है तब ऐसा लगने लगता है जैसे जिंदगी की सामान्य समस्याओ को भी सुलझाना कठिन हो गया है। बर्न-आउट मानसिक या शारीरिक कारणो से हो सकता है। यह लंबे दवाब तथा थकान का परिणाम होता है।बर्न-आउट कार्य-संबंधी या व्यक्तिगत या दोनों कारणो से हो सकता है। ऐसे में मानसिक तनाव व स्ट्रैस बढ़ जाता है। स्वभाव में चिड़चिड़Iपन बढ़ जाता है। व्यक्ति अपने को ऊर्जा-विहीन, असहाय व दुविधाग्रस्त महसूस करने लगता है।

बर्न-आउट कैसे पहचाने ?
ऐसे मे नकारात्मक सोच ज्यादा बढ़ जाती है। आत्मविश्वास व प्रेरणा मे कमी , अकेलापन, आक्रोश, नशे की लत, जिम्मेदारियो से भागने जैसे व्यवहार बढ़ जाते है। ऐसा व्यक्ति अपना फ्रस्टेशन दूसरों पर उतारने लगता है। ऐसे मे व्यक्ति हमेशा थका-थका व बीमार महसूस करता है। लगातार सिर और मांसपेशिओ मे दर्द, भूख व नींद मे कमी होने लगती है। अपने कार्य मे रुचि मे कमी, हमेशा असफलता का डर, अपना हर दिन बेकार लगने लगता है। ऐसे व्यक्ति दूसरों के साथ जरूरत से ज्यादा कठोर, असहनशील और चिड़चिड़ा हो जाता है। गैस्ट्रिक व ब्लड-प्रेशर का उतार-चढ़ाव असामान्य हो जा सकता है।
ऐसे परिवर्तनो का मतलब है कि अपने शारीरिक व मानसिक कार्य भार को सही तरीके से संभालने की जरूरत है। अगर संभव है तो कार्य-भार को कम कर देना चाहिए। साथ ही अपने लाइफ-स्टाइल को संयमित करना कहिए। अपनी आवश्यकताओ तथा समस्याओं को समझ कर उनका ध्यान रखना चाहिए।

समाधान-
ऐसी समस्याए अक्सर काम को लत (वर्कहोलिक) बना लेने वाले लोगों में ज्यादा पाया जाता है। इसलिए काम के साथ-साथ मनोरंजन, रचनात्मकता, मित्रों और परिवार के साथ समय बिताना भी जरूरी है। जीवन की खुशिया मानसिक तनाव काम करती है। हर काम का ध्येय सिर्फ जीत-हार, जल्दीबाजी या लक्ष्य-प्राप्ति नहीं रखना चाहिए। सकारात्मक सोच और दूसरों को समझने की कोशिश भी आवश्यक है। जिंदगी की परेशानियों और समस्याओं को सही नजरिए से समझना भी जरूरी है। समस्याओं से बचने के बदले उनका सामना करना चाहिए। काल्पनिक दुनिया से हट कर वास्तविकता और जरूरत के मुताबिक कठिनाइयों को सुलझाना चाहिए। कार्य-स्थल पर टीम मे काम करना, अपनी समस्यओं को बताना, नयी जिम्मेदारियों को सीखना भी सहायक होती है। कुछ लोग ‘ना’ नहीं बोल पाने के कारण अपने को काम के भार तले दबा लेते है। ‘ना’कहना सीखना चाहिए।
प्राणायाम, योग, योगनिद्रा, ध्यान, मुद्रा आदि की भी मदद ली जा सकती है। इससे तनावमुक्ति होती है। स्फूर्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पूरे व्यक्तित्व को सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। आयुर्वेद मे तुलसी को नर्व-टानिक तथा एंटिस्ट्रैस कहा गया है। अतः इसका भी सेवन लाभदायक हो सकता है,पर गर्भावस्था में बिना सलाह इसे ना लें।

Source: बर्न-आउट ( एक सामान्य मनोवैज्ञानिक समस्या )

Zeigarnik effect – Utilise its Positive side ज़ैगर्निक इफेक्ट के फायदे

 

मेरे एम ए की पढ़ाई के दौरान  एक दिन हमारे एक शिक्षक ने एक प्रयोग दिया, पर उसके बारे में कुछ नहीं बताया । अगली क्लास में , कुछ दिनों बाद उन्होंने सभी से उस एक्सपेरिमेंट का नतीजा जानना चाहा।

मेरे क्लास के सभी स्टूडेंट्स के रिजल्ट लगभग एक समान थे और मेरा रिजल्ट बिल्कुल उल्टा था।  शिक्षक ने कुछ देर में पूछा कि सारी रिजल्ट एक जैसे हैं  या  किसी का रिजल्ट इससे अलग आया है? मैं अपने अलग रिजल्ट से थोड़ा परेशान थी फिर भी मैं अपनी कॉपी के साथ अपनी टीचर के पास पहुंची।

तब उन्होंने बताया कि वह ऐसे  रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे । उन्हों ने  बताया कि इसे  कहते हैं. जिसका अर्थ है कि अक्सर कुछ लोग अधूरे या बीच में रोक दिए गए काम को ज्यादा याद रख  हैं। यह  मनोविज्ञान का एक  फिनोमिना  हैं। इसका बहुत अधिक इस्तेमाल मनोरंजन की दुनिया में अधूरे सीरियल या अधूरी कहानियों के रूप में किया जाता है जिससे उनके प्रोग्राम की पॉपुलैरिटी बनी रहे । इसका लाभ हम भी उठा सकते हैं।

पढ़ाई – जिन विद्यार्थियों में यह स्वभाव है वह अपनी पढ़ाई को बीच बीच में रोक कर कुछ अन्य काम कर सकते हैं(जैसे- खेलना, मनोरंजन या अपनी हॉबी वाले काम ) और फिर पढ़ाई आगे बढ़ा सकते हैं । उन्हें पढ़ाई बेहतर याद रहेगी। यह उन्हें अच्छी याददाश्त प्रदान करेगा।

मल्टीटास्किंग – वे एक साथ में दो तरह के काम करने का फायदा उठा सकते हैं जिसमें एक काम के बाद कोई दूसरा अन्य काम करें और फिर वापस पहले काम पर आएं तो इस तरह से दो या तीन काम होते रहते हैं और चूँकि ऐसे लोगों में काम खत्म करने  की प्रवृति  मजबूत होती है, इसलिए काम तेजी से होता है अौर जल्दी खत्म होता है। साथ हीं  अगले काम को करने की प्रेरणा बनी रहती है

तनाव  दूर करना – अधूरे काम से  तनाव  होता है।  तनाव को खत्म करने के लिए एक आसान तरीका है, छोटे हलके काम करना। जिससे  काम खत्म होने के बाद लोग तनावरहित  महसूस करते हैं उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।

 

अधूरा काम हमारी उत्सुकता को बनाए रखता है और हम उत्साहित रहते हैं। दुनिया के बहुत से खोज इसी स्वभाव के कारण हुए है इसलिए हमें अपनी उत्सुकता को बनाए रखना चाहिए और ज़ैगर्निक इफेक्ट के  सकारात्मक रूप का फायदा उठाना चाहिए।

क्या आपको अधुरी बातें ज्यादा याद रहती हैं? Zeigarnik effect #Psychology

 

In psychology, the Zeigarnik effect states that people remember uncompleted or interrupted tasks better than completed tasks. but it may vary person to person.

 

मनोविज्ञान में, ज़ैगर्निक प्रभाव में कह गया है कि कुछ लोगों को अधुरी बातें ज्यादा रहतीं है। इस प्रभाव के अनुसार   जो छात्र अपने  पढ़ाई के बीच-बीच में थोङा समय दूसरे काम मे लगाते  हैं (जैसे- खेलना, मनोरंजन या अपनी हॉबी वाले काम  ) उन्हें पढ़ाई बेहतर याद रहती है।

पत्रिकाअों व  टी. वी. के  अधुरे धाराविहिक अौर कहानियाँ इसलिये अक्सर हमें आगे की कहानी जानने के लिये प्रेरित करते है। पर यह जरुरी नहीं है कि यह सब  के ऊपर ऐसा असर ङालें । क्योंकि इस प्रभाव को बहुत से अन्य बात भी प्रभावित  करते हैं।

My column on parenting

Bringing up children can be one of the most gratifying and at the same time one of the most terrifying of life’s activities. Today, Dr. Rekha of AccioHealth tackles behavioural issues in children with her usual sensitivity and expertise. Do send us your questions too, if you want Dr. Rekha to address them(admin@mumbaimom.com). Dr Rekha @Mumbai Mom