आधे चाँद का दर्द
वही समझ सकता है,
जो आधा अधूरा होने
का एहसास जानता है.
चाँद जानता है
जल्दी ही वह पूरा हो कर आएगा .
भले हीं एक दिन के लिये हीं……
वह पूरा होने की जद्दो -जहद में
दस्तूर निभाता रहता है………
यह सोच कर कि उसका इंतज़ार
और सब्र काम आएगा।
Trees bend low with ripened fruit;
clouds hang down with gentle rain;
noble people bow graciously.
This is the way of generous things.
Image by Rekha Sahay.
~~Bhartrhari Probably the biggest insight… is that happiness is not just a place but also a process. …Happiness is an ongoing process of fresh challenges, and… it takes the right attitudes and activities to continue to be happy. – Ed Diener


Indispire Topic , Edition – 259. How happy are you? Do you look for reasons to be happy? Are smiles linked with happiness?
आज हर जगह चल रही है खुशियों की खोज।
कुछ बाहर खोज रहे हैं ,
कुछ दूसरों के पास खोज रहे हैं।
दिल्ली सरकार, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कई विश्वविद्यालय
साइंस ऑफ हैप्पीनेस – खुशियों का विज्ञान पढ़ा रहे हैं।
शायद लोग खुशियां ढूंढ लें !!!!
अक्सर हम भूल जाते हैं कि खुशियां हमारे अंदर मिलेंगी,
हमारे दिलों की धड़कनों के साथ।
हमारी भी, अौरों की तरह कोशिश जारी है प्रसन्नता पाने की।
मुस्कान का क्या है ?
फेशबुक की हर तस्वीर मुस्कुराती है।
हम आँखों के आँसू छुपातें हैं, कई बार मुस्कान के पीछे ।
रोती आँखों से मुस्कुराते हैं कई बार।
मुस्कुराहट और खुशी हमेशा साथ हों यह जरूरी नहीं है ,
खुशियाँ के साथ स्मित हो, यह सोने पर सुहागा है।
लेकिन मुस्कुराकर खुशियाँ हासिल नहीं होतीं ।
हाँ, खुशियों से मुस्कुराहट जरूर आ जाती है चेहरे पर।


जो भगवान को भी नहीं छोड़ते ,
वे इंसान और मानवता क्या समझेंगे .
तनहाइयों में भी हम तन्हा नहीं
यादों की भीड़ घेर लेती है .
वरना भीड़ में भी अकेले हीं होते हैं.


आप इसे यूनिक कहो या अनोखा,
चूहे के बिल या रैट होल सुरंग …
यह तो हमारी सदियों पुरानी कला है।
देखिए, इस क्षेत्र में तो हम आपसे बहुत आगे हैं।
पर हमें शान, गुमान या घमंड नहीं।
तब भी पांडवों को कौरव पकङ नहीं पाए।
आज भी हमारी पुलिस हमें नहीं पकड़ पाई.
old news – Robbers tunnel into bank in Navi Mumbai, loot valuables worth ₹6 crore from 30 lockers
Charity begins at home…….????

शाश्वत रूप से अनुत्तरित एक प्रश्न है – जान की कीमत इतनी कम क्यों ?
पर अब एक नया प्रश्न है – जान की कीमत है भी या नहीं ?
और करनी है प्रिय वस्तु की कुर्बानी तब
अपनी जान अनमोल है ना ?
होगा वरना स्वार्थ पूर्ण।
सबसे मार्मिक स्थिति है उस बच्चे की है,
जो अपने घर में अपनों के साथ सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा हो–
ना जाने कब क्या हो जाए ?
courtesy- Inserts & News 18.
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