जिँदगी के रंग – 43

जिंदगी की

 यादें भी बङी बेवफा होतीं हैं,

जिन लम्हों पर कोई हक़ नहीं होता,

उन्हें हीं हक़ से याद करते रहतीं हैं,

जीवन के हर लम्हों में उन्हें

अपनेपन से 

शामिल करते रहतीं हैं।

13 thoughts on “जिँदगी के रंग – 43

  1. sahi likha apne….badhiya.
    कितनी सुकून भरी होती हैं यादें,
    नहीं बस में फिर भी ख़ास होती है यादें

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