शब्दों के घाव destroy somebody by words

तलवार अौर आघातों के

गहरे घावों को भरते देखा है।

पर ना दिखने वाले शब्दों के घावों

को ताउम्र कसकते देखा है।

शब्दों से किसी को नष्ट करना आसान है

पर कटु शब्दों के तासीर को

नष्ट करना नामुमकिन है।

 

25 thoughts on “शब्दों के घाव destroy somebody by words

  1. बिलकुल ठीक बात है यह रेखा जी । फ़िल्म ‘देशप्रेमी (1982) में अमिताभ बच्चन पर फ़िल्माए गए गीत ‘मेरे देशप्रेमियों, आपस में प्रेम करो देशप्रेमियों’ का एक अंतरा है – ‘मीठे पानी में ये ज़हर न तुम घोलो,
    जब भी कुछ बोलो, ये सोच के तुम बोलो – भर जाता है गहरा घाव जो बनता है गोली से, पर वो घाव नहीं भरता जो बना हो कड़वी बोली से, दो मीठे बोल कहो मेरे देशप्रेमियों’ । हमारे शास्त्रों में भी तो कहा गया है – सत्यं ब्रूयात्, प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यं-अप्रियं’ । इसलिए कटु वाणी से तो यथासंभव बचना ही चाहिए ।

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    1. वाणी की कटुता कितनी घातक होती है , यह हम सब जानते हैं फिर भी इसे हथियार बनातें हैं। क्योंकि क्रोध पर नियंत्रण बङा मुश्किल है। शायद यही समझाने के लिये ये गीत, विचार, श्लोक आदि रचे गये हैं।
      हमेशा की तरह आपके सुलझे…. गीतमय विचार सराहनीय हैं। इतने महत्वपुर्ण श्लोक के लिये आपका आभार।

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  2. sahi kaha…..ye shabd bahut hi ajeeb hain….
    kabhi kabhi antarman ko binaa chhuyee gudgudaa jaata hai
    aur kabhi tikhe shabd aise jakhm de jaata hai jise koyee marham mita nahi sakti.

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  3. कुछ शब्दों में ही आप बहुत गहरी बातें लिख देती है , जीवन केे मर्म को बहुत अच्छे तरीके से आपने लिखा है Very nice 👍

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    1. जीवन के रोज़मर्रा की बातें हीं लिखती हूँ और मुझे ज़्यादा लम्बा लिखने से सरल और आसान लगता है, कम शब्दों में लिखना. मेरी कविता और लेखन शैली पसंद करने के आभार अजय.

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