Hope 


If you’re abandoned.

If you’re left hopeless.

Tomorrow for sure ,

you’ll be called again.

 

❤ Rumi

21 thoughts on “Hope 

  1. बिलकुल ठीक बात है रेखा जी । रफ़ी साहब का अमर गीत है – ‘रात भर का है मेहमां अंधेरा, किसके रोके रुका है सवेरा’ । उम्मीद क्यों छोड़ी जाए ? उम्मीद पर ही तो कायनात कायम है । और हर रात के बाद दिन का आना तय ही है । एक गीत हरिहरन जी का भी है इसी संदर्भ में – ‘ज़माने में सभी को मिलते हैं ग़म, तुम न घबराना; यहाँ हर रात की सुबह है हमदम, तुम न घबराना’ ।

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    1. बहुत आभार . सही है , उम्मीद पर ही दुनिया कायम है . खूबसूरत गीतों को याद दिलाने के लिये शुक्रिया जितेंद्र जी .😊

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  2. True but know more about Rumi and his life in contemporary Iran .. he lived in a latter period of Omar Khayyam .. people considered him mad … but both were great philosophers of the East .. greater than Aristotle and Plato

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