कठपुतली

हम समझते हैं कि

हम सब समझते हैं।

पर ऊपर बैठ,

जो अपनी ऊँगलीं के धागे से

हम सबों को नचा रहा है कठपुतली सा।

उसे हम कैसे भूल जाते हैं?

16 thoughts on “कठपुतली

Leave a reply to luminouslife154 Cancel reply