इंद्रधनुष -कविता Rainbow -poem


Indian Bloggers

 

There is nothing in this world that is not a gift from you  ~  Rumi.

 

ज़िंदगी के सात रंगों को भूल,

       हम जीवन को ढूँढ रहे हैं

          काले-सफ़ेद रंगों के धुआँ अौर  धुंध में।

                   भाग रहें हैं,  अनजानी राहों पर ,

                       दुनिया के मायावी  मृगतृष्णा के पीछे।

                            आंगन की खिली धूप, खिलते फूल,

                                  बच्चों की किलकारी, 

                                   ऊपरवाले की हर रचना है न्यारी।

                                       अगर कुछ ना कर सको ,

                                        तो थमा दो ऊपर वाले को अपनी ङोर।

                                           खुबसूरत सतरंगी  इंद्रधनुषी  लगेगी,

                                                 ज़िंदगी हर अोर। 

 

 

image from internet.

65 thoughts on “इंद्रधनुष -कविता Rainbow -poem

  1. I wanted to know more about your spiritual life. What makes you think the way you think ?
    If you feel like sharing .

    Beautiful poem indeed.

    You really expressed well in the philosophy of life.

    Have wonderful time ahead !

    Liked by 6 people

    1. Hi Nisthur, Its a difficult qus to ans , I am just like any other simple person. I belive , be greatful for whatever comes to our life ( good or bad ) They all are send from almighty to guide us. thanks for compliment.

      one thing impressed me about your writeups. That is spiritual bent. Specially , When most of the writers of your age group are writing about – romance , love , beauty…..

      Liked by 3 people

      1. Yeah I know it’s difficult question to answer but you have some thing deep understanding may be you are not able to express or generous for not claiming the credit.

        Anyway you answered very well , I agree with you.

        I try to write about love , romance and beauty but it doesn’t come to me naturally. I have struggle a lot . Once in while I struggle and write.

        Spirituality is normal flow of my life it comes to me effortlessly.

        I am glad I could connect to you thanks for your incredibly valuable time.

        Liked by 3 people

  2. बहुत सुंदर कविता अौर बहुत सुंदर भाव । हार्दिक अभिनंदन रेखा जी ।

    Like

  3. वाह! बहुत ही खूबसूरती से लिखा है 🙂
    और आपका धन्यवाद मेरी लगभग सारी पोस्ट्स को like करने के लिए. मुझे भी आपका ब्लॉग बहुत पसंद आया, बहुत दिनों बाद किसी ऐसे इंसान को देखा है जो हिंदी भाषा को इतनी इज़्ज़त दे रही हैं, वरना आज के दौर में लोग हिंदी भाषा बोलने से भी कतराते है. इसीलिए, शुक्रिया आपका, आपकी सारी पोस्ट्स हिंदी में लिखने के लिए! 🙂

    Liked by 1 person

    1. करुणा आप बहुत अच्छा लिखती हैं. 😊
      मुझे महसूस होता हैं , हिन्दी एक वैज्ञानिक भाषा हैं और यह मेरी मातृ भाषा भी हैं.
      हम लेखकों को भाषा के दायरे से ऊपर उठना चाहिये और हर भाषा का सम्मान करना चहिये. जैसा अभी आपने किया. बहुत धन्यवाद 😊

      Liked by 1 person

      1. ओह शुक्रिया, मुझे ख़ुशी हुई के आपको मेरी लिखाई पसंद आयी 🙂
        सही कहा आपने, हम सबको हमारी मातृभाषा का सम्मान और उपयोग अपनी बोल-चाल में करते रहना चाहिए। मैं उम्मीद करती हूँ के आपके ब्लॉग और आप जैसे और लोगों के हिंदी ब्लॉग को पढ़के लोग हिंदी भाषा में अपनी रूचि को बढ़ाएं। मैं भी कोशिश करुँगी अपनी कुछ पोस्ट्स हिंदी में लिखूँ। 🙂

        Keep blogging and be happy always, really you’re doing amazing job! God bless, Good luck to you 🙂

        Liked by 1 person

      2. आपके तारीफों के लिये शुक्रिया. आप ऐसे ही अपने विचार लिखते रहिये. अच्छा लगा आपका कॉमेंट पढ़ कर.
        Keep smiling and stay healthy. Allthe best.

        Liked by 1 person

  4. प्यारी कविता है आपकी ,इंद्रधनुष को देखने के बाद काले और सफेद रंग का महत्व नही रह जाता भगवान ने अद्भुत चीज बनायी है। मैने अपनी तरफ से कुछ लिखा है इसी मे जोड़ रही हूँ …..

    ये जीवन सात रंगो का ही तो है खेल
    फिर भी काले और सफेद रंग से क्यूँ है लोगो का मेल
    ऊपर वाले ने तो वैसे ही थामी हुयी है सबकी डोर
    बस नजर नजर का ही तो है फेर

    Liked by 2 people

    1. वाह क्या खूब लिखा है आपने. बेहद खूबसुरत और मनभावन !!!
      हाँ डोर नियंता के हाथों में है यह समझ देर से आती है. बहुत बहुत शुक्रिया.

      Like

      1. सुंदर और मनभावन कविता है रेखा जी आपकी । अभिनंदन । धूप में निकलो, घटाओं में नहा कर देखो; ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो ।

        Liked by 2 people

      2. हमेशा की तरह इस बार भी जितेंद्र जी आपकी तारीफ का अंदाज निराला है। इतने खूबसूरत शब्द और इतनी खूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

        Liked by 1 person

  5. Read your poem and liked very much! Painted your poem in seven color is a another creativity.
    You expressed seven colors of life one of them on black cloud and white cloud role in life. Anyhow this the life process we have face the different colors of life and go ahead to get success.

    Liked by 2 people

      1. You could try going to Appearance, then Widgets on your blog dashboard. There ought to be a translation widget you can add (it may say something like “Google translation”. Click and drag it to the sidebar or footer for your site. Hope that helps. Best wishes.

        Liked by 1 person

  6. Had missed this beautiful Blog of yours. Bahut sundar abhiwyakti aaj ke jeewan ki! Kaise hamara focus positive se jyada negative par hai! “Negative”(Black) hamari nazar mein hon par focus hamara Positive (Indradhanush) par ho!

    Like

  7. आपकी कविता और Mrs.Vachaal के कॉमेंट्स पढ़ कर मन में आये भाव :
    आपकी बातों से और Mrs.Vachaal के कॉमेंट्स से सहमत होते हुवे भी रखना चाह रहा हूँ एक और नजरिया :

    श्वेत व श्याम को दुत्कारें
    यह अच्छी नहीं बात
    श्वेत से ही प्रस्फुटित हैं
    इंद्रधनुष के ये रंग सात
    श्याम रंग है, है तभी
    श्वेत व अन्य रंगो की बिसात
    रात के बिना भोर की भला
    क्या होती कोई औकात !?
    “डोर ऊपर वाले के हाथ”
    यह बात तो हमने मानी
    पर पूरी ढील दे रखी हमें
    करने को मनमानी
    अपनी स्वयं की
    लिख सकते हम कहानी
    यह हम पर है दारोमदार
    कैसा निभाते अपना किरदार
    केवल इंद्रधनुषी रंगो में रहें खोयें
    या श्वेत श्याम संग सम होयें ?

    Liked by 1 person

    1. पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहूँगी क्योंकि आपने मेरी पुरानी कविता और उसके comments पर इतना ध्यान दिया.
      यहाँ पर काला और सफ़ेद से मेरा आशय इन्हें ख़राब कहने का नहीं है. वरण ज़िंदगी के कालिमा और अवसाद से है. मेरे विचार से Mrs Vachaal ने भी इसका हीं समर्थन किया है.
      वैज्ञानिक तथ्य के रूप में आप 100% सहीं हैं. और मैं आपसे पूर्ण रूप से सहमत हूँ. कविता को इस नज़रिए से देखने के लिए और कविता रूप में जवाब देने के लिए आभार .

      Liked by 1 person

      1. रेखा सहाय जी , मैं आपका और Mrs Vachaal का आशय बखूबी समझ गया था ! बहुत अच्छी तरह समझ आ रहा था की काले से आप अवसाद दर्शाना चाह रही हैं और श्वेत से रंगहीनता को |
        मेरा ये प्रयास, अनायास ही हुवा , मन में आये अपने कुछ अलग से परिपेक्ष्य को साझा करने का !
        वैज्ञानिक तथ्य का तो सहारा मात्र है अपनी बात में थोड़ा बल देने का ,मेरा सोचना है कि श्वेत और विभिन्न रंग एक दूजे में समाहित हैं जैसे सुख दुःख भी एक दुसरे में विद्यमान हैं ! जीवन की कठिनाइयों से ही जीवन के आंनद को पूर्णतया समझ पाते हैं उसका असली मूल्य भी |
        मेरे प्रयास को सराहने के लिए धन्यवाद !

        Liked by 1 person

      2. आपने कविता के लिए एक नया नज़रिया पेश किया और मेरे विचारों को पसंद किया . यह वास्तव में क़ाबिले तारीफ़ है. अक्सर मैं लिखते समय अनेक कोणों से अपने लेखन का मूल्यांकन करना चाहती हूँ. पर जैसा कि आप भी जानते हैं, अपनी ग़लती , ख़ामियाँ या महत्वपूर्ण बिन्दू अक्सर हम सबों से नज़र अन्दाज़ हो जाता है.
        यहाँ पर सुधी पाठक और आलोचक का मूल्यांकन महत्व रखता है. वे उसे अलग दृष्टिकोण और नज़रिया देते हैं. आपने भी वही किया. इसके लिए आभार.

        Liked by 1 person

    2. पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहूँगी क्योंकि आपने मेरी पुरानी कविता और उसके comments पर इतना ध्यान दिया.

      Like