कपूर – camphor (  some valuable tips )

 

kapur

कपूर और उसकी खुशबू से हम सब परिचित हैं. यह हमारे पूजा पाठ में प्रतिदिन काम  आता हैं. हमारे प्राचीन धर्म से जुटी वस्तुएँ अक्सर कुछ न कुछ महत्व रखती  हैं.

  कपूर पूजा के अतिरिक्त भी  अनेक काम में लाया  जा सकता हैं  –

1 कपूर की 4-5 टिकिया अलमारियों , ड्रौर और कबर्ड के हर खाने में रख देने से यह   फ्रेशनर का  काम करता हैं. अलमारी खोलने पर इसकी  भीनी – भीनी  खुशबू ताजगी  का एहसास कराती  हैं. यह बरसात में सीलन के महक को हटाता हैं.

2 किसी कप या कटोरी में पानी में 10-15 कपूर डाल कर     रखने से  मक्खियों  और लाही ( छोटी मक्खियों जैसे कीडे    ) से छुटकारा मिलता हैं.

3.  पोछे के पानी में 2-4 कपूर की टिकिया चूर  कर डालने से कीडे और मक्खियों में कमी आती हैं. यह भी मान्यता हैं , इससे घर के वास्तु दोष दूर होते हैं.

ये आजमाये , परखे  और लाभदायक नुस्खे हैं.

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मनोविज्ञन#3- धर्म मेँ मनोविज्ञन का छिपा रहस्य Psychology and religion / spirituality

 

 Psychology in religion – Religion is a learned behaviour, which has a strong and positive impact on human personality, if followed properly.

धर्म बचपन से सीखा हुआ व्यवहार है. अपने अराध्य या  ईश्वर के सामने अपनी मनोकामनायेँ कहना या अपनी भूल  कबुलना, ये  हमारे सभी बातेँ व्यवहार को साकारात्मक रुप से प्रभावित करती हैँ. जो मनोविज्ञान का भी उद्देश्य  है.

 प्रार्थना, उपदेश, आध्यात्मिक वार्ता, ध्यान, भक्ति गीत, भजन आदि सभी गतिविधियाँ  धर्म का हिस्सा हैँ. ध्यान देँ तब पायेंगेँ , ये सभी किसी ना किसी रुप मेँ हम पर साकारात्मक असर  डालतीँ  हैँ. अगर गौर करेँ, तब पयेँगेँ ये सभी व्यवहार किसी ना किसी रुप में  मनोवैज्ञानिक

  • ये आत्म प्रेरणा या  autosuggestion देते हैँ.
  • अपनी गलतियोँ को स्वीकार करने से मन से अपराध  बोध/ गिल्ट कम होता है
  • अंतरात्मा की आवाज सुनने की सीख, अपनी गलतियोँ को समझने की प्रेरणा देता है.
  • सोने के पहले अपने दिन भर के व्यवहार की समिक्षा करने की धार्मिक शिक्षा मनोविज्ञान का  आत्म निरीक्षण या introspection है.

अध्ययनोँ से भी पता चला है – ध्यान, क्षमा, स्वीकृति, आभार, आशा और प्रेम जैसी धार्मिक परंपराएँ हमारे व्यक्तित्व पर प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक असर डलता हैं।

 

clinical reports suggest that rehabilitation services can integrate attention to spirituality in a number of ways.

(“Spirituality and religion in psychiatric rehabilitation and recovery from mental illness”- ROGER D. FALLOT Community Connections, Inc., Washington, DC, USA International Review of Psychiatry (2001), 13, 110–116)

 

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आम के आम,  गुठलियोँ के दाम – 1   पुदिना प्रोग्राम – चटनी, स्टोक , बागवानी. (3 in 1- uses of Mint : Dip, Stock and Gardening ) 

 

 

पुदीने की  एक गड्डी आपके तीन काम आ सकती है. सबसे पहले पुदीने की गड्डी को तीन हिस्से मेँ अलग-अलग

कर लेँ –

  1. पत्ते,
  2. पतली टहनियाँ, पुराने और पीले पत्ते ( जिन्हे आप फेँकने वाले हैँ )
  3. मोटी डंडियाँ

#चटनी –

पुदीने की गड्डी – 100 ग्राम

इमली –  25 ग्राम

हरी मिर्च – 4-5

गुड  – 10-20  ग्राम

सरसोँ तेल – 1  चम्मच

नमक – स्वाद अनुसार

पुदीने की गड्डी से पत्ते अलग करे. धो कर हरी मिर्च, ईमली, गुड, सरसोँ तेल,  नमक डाल कर  मिक्सी मेँ बरीक पीस लेँ. चटनी तैयार है. पकौडियोँ या किसी मन पसन्द भोजन के साथ खा सकते हैं. फ्रिज मेँ 3-4 दिन रख कर काम मेँ ला सकतेँ हैँ.

#सूप स्टोक, गोलगप्पे का पानी या शोरबा   

पुदीने की गड्डी की पतली टहनियाँ, पुराने और पीले पत्ते  ( जिन्हे आप फेँकने वाले हैँ ) धो लेँ. कुकर मेँ एक कप पानी मेँ 5 मिनट उबाल लेँ. इस पानी को आप सूप स्टोक, गोलगप्पे का पानी या शोरबा/ सब्जी मेँ डालने के काम मेँ ला सकतेँ हैँ. हम सभी जानतेँ हैँ, पुदीने का पानी पेट के लिये लाभदायक होता है.

# बागवानी –

पुदीने के पौधे लगाना बडा सरल होता है.  पुदीने की गड्डी मेँ से पत्ते निकाल कर मोटी डंडियाँ अलग कर लेँ. अगर ध्यान देँगे, तब किसी-किसी डंडी मेँ पतली- पतली जडेँ भी नज़र आयेँगी. इन्हेँ अपने बगीचे या किसी गमले मेँ लगा देँ. समय-समय पर पानी देते रहेँ. जल्दी हीँ इन मेँ नये पत्ते आने लगेगेँ.

 

चित्र -इंटरनेट से.

 

मनोविज्ञान#3 मन मेँ गिल्ट/ अपराध  बोध ना पालेँ (व्यक्तित्व पर प्रभाव) Guilt (emotion)

 

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( Alice Miller claims that “many people suffer all their lives from this oppressive feeling of guilt.”

Feelings of guilt can prompt subsequent virtuous behaviour. Guilt’s  are one of the most powerful forces in undermining one’s self image and self-esteem.  Try to resolve it.)

 गिल्ट या  अपराध  बोध एक तरह की  भावना है. यह हमारे नैतिकता का उल्लंघन, गलत आचरण जैसी बातोँ से   उत्पन्न होता है. इसके ये कारण हो सकतेँ हैँ –

  • बच्चोँ/ बचपन मेँ  अपने माता-पिता की उम्मीदों पर खरा ना उतरने की भावना.

  • अपने को दोषी/ अपराधी महसूस करना.

  • किसी को चाह कर भी मदद/ पर्याप्त मदद न कर पाने का अह्सास.

  • अपने आप को किसी और की तुलना में कम पाना.

 हम सब के  जीवन मेँ कभी ना कभी ऐसा होता हैँ. हम ऐसा व्यवहार कर जाते हैँ,  जिससे पश्चाताप और आंतरिक मानसिक संघर्ष की भावना पैदा होती है. यह हमारे अंदर तनाव उत्पन्न करता है. जब यह अपराध-बोध ज्यादा होने लगता है, तब यह किसी ना किसी रुप मेँ हमारे व्यवहार को प्रभावित करता है.

अपने व्यवहार को समझे और सुधारेँ –

  • अपने गिल्ट को समझने की कोशिश करेँ.

  • अपनी गलतियोँ को स्वीकार कर सुधार लायेँ. अस्विकार ना करेँ.

  • तर्कसंगत तरीके से ध्यान देँ गिल्ट अनुचित तो नहीँ है

  • तर्कसंगत गिल्ट व्यवहार सुधारने मेँ मदद करता है.

  • माफी माँगना सीखे.

  • भूलवश गलती हो, जरुर माफी मांगे.

  • अपनी गलतियोँ को अनदेखी ना करेँ.

  • बच्चोँ / लोगोँ से अत्यधिक अपेक्षा ना रखेँ. वे जैसे हैँ वैसे हीँ उन्हेँ स्वीकार करेँ.

  • पूर्णता किसी में मौजूद नहीं है।

  • अपने आप को जैसे आप हैँ वैसे हीँ पसंद करेँ. तुलना के बदले आत्म स्वीकृति की भावना मह्त्वपुर्ण है.

  • बच्चोँ को हमेशा टोक कर शर्मिंदा ना करेँ.

  • जरुरत हो तब बेझिझक कौंसिलर से मदद लेँ.

गिल्ट आत्म छवि, आत्मविश्वास, और आत्म सम्मान कम करता हैं । गहरा गिल्ट चिंता, अवसाद , बेचैनी या विभिन्न मनोदैहिक समस्याओं के रूप में दिखाता है. इसलिये गिल्ट की  भावनाओं को दूर करना चाहिये.

 

 

 

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मनोविज्ञान#2 आत्म प्रेरणा से अपना व्यक्तित्व निखारे. Self-improvement by autosuggestion

Auto suggestion – A process by which an individual may train subconscious mind for self- improvement.

यह एक मनोवैज्ञानिक तकनीक है. आत्म प्रेरित सुझाव विचारों, भावनाओं और व्यवहारोँ को प्रभावित करता हैँ. किसी बात को बारबार दोहरा कर अपने व्यवहार को सुधारा जा सकता है.

अपनी कमियाँ और परेशानियाँ हम सभी को दुखी करती हैँ. हम सभी इस में बदलाव या सुधार चाह्ते हैँ और जीवन मेँ सफलता चाहतेँ हैँ. किसी आदत को बदलना हो, बीमारी को नियंत्रित करने में अक्षम महसुस करतेँ होँ, परीक्षा या साक्षात्कार में सफलता चाह्तेँ हैँ. पर आत्मविश्वास की कमी हो.

ऐसे मेँ अगर पुर्ण विश्वास से मन की चाह्त निरंतर मन हीँ मन दोहराया जाये. या अपने आप से बार-बार कहा जाये. तब आप स्व- प्रेरित संकल्प शक्ति से अपनी कामना काफी हद तक पुर्ण कर सकतेँ हैँ और अपना व्यवहार सुधार सकते हैँ। जैसे बार-बार अपनी बुरी आदत बदलने, साकारात्मक विचार, साक्षात्कार मेँ सफल होने, की बात दोहराया जाये तब सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है.

ऐसा कैसे होता है?
हमारा अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली है. बार बार बातोँ को दोहरा कर अचेतन मन की सहायता से व्यवहार मेँ परिवर्तन सम्भव है. साकारात्मक सोच दिमाग और शरीर दोनों को प्रोत्साहित करतेँ हैँ. इच्छाशक्ति, कल्पना शक्ति तथा सकारात्मक विचार सम्मिलित रुप से काम करते हैँ. पर यह ध्यान रखना जरुरी है कि हम अवस्तविक कामना ना रखेँ और इन्हेँ लम्बे समय तक प्रयास जारी रखेँ.a s

 

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ब्लॉग लेखन टिप्स                   (Blog writing tips )

 

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(Age old practice of writing , black on white is best.

Don’t be too  ornamental.

 bold font may be used for strong expression.)

मुझे इस बात की बड़ी खुशी हैं , ब्लॉग की हमारी यह दुनिया अच्छे लोगों से भरी हैं. मेरी  कहानी और लेखों को पढ कर मुझे  कुछ  अनमोल सुझाव मिले. जो मैं आप सबों के साथ बाँटना चाहती हूँ.

इस रंगीन दुनियाँ में सब ओर रंग बिखरे हैं. पर सफ़ेद पर काले लिखावट ही आँखों को सुकून देते  हैं.

लेख को ज्यादा  सजावट, बनावटी बना देता हैं. अतः स्वभाविकता बना रहे इसका ख़याल रखें.

 बोल्ड और स्वभाविक अक्षरों के प्रयोग से अपनी भावनाओं को ज्यादा सही तरीके से व्यक्त किया जा  सकता हैं. अपनी बात को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने में बोल्ड अक्षर सहायक होते हैं.

 

 

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Veils, Halos & Shackles     (book review of an international poetry collection)     बेडियों और  घूंघट में  उलझी नारी की आभा  मंडल  ( एक अन्तराष्ट्रीय पुस्तक की समीक्षा)

यह काव्य   महिलाओं पर हुई हिंसा , उत्पीड़न और भेदभाव की  घटनाओं पर आधारित  कविताओ का   संकलन हैं. महिलाओं पर  दुनिया में हो रहे दुर्व्यवहार को कविताओ  में पिरो कर, दुनिया को दिखाने की  अद्भुत और अनोखी  कोशिश हैं.

लौ दिलों में जलती रहे – महिलाओं के अपमान की कहानी सीता और द्रौपदी के काल से चली  आ रही हैं. पर आज़ इसका विकृत रुप डराने लगा हैं. इस पुस्तक का उद्देश्य हैं , हर जगह , हर काल में होनेवाली इस मानसिक विकृति को हम ना भूलें और इस जलती लौ को मशाल बना इसका सामना करे. इसके शिकार को नहीँ, दोषी को नीची नज़र से देखें. इसका सामना निर्भय हो कर करें.

24 देशों के 180 विचार लिखते कवि – नारी को सम्मान देनेवालों की कमी नहीँ हैं. इस संकलन में  दुनिया के दो  दर्जन देशों के विद्वानों -मनीषियों का योगदान हैं. उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति 250 से अधिक कविताओं के द्वारा हुई  हैं.

कवियों के दिल में अनछुए कोने में  झांकने का द्वार -” वेल्स हैलोज़ और शैकेल्स ” यह मार्मिक संकलन आपको उनके दिलों के दर्द भरे पहलुओं के करीब ले जायेगा. इसमें लिखने वालों में से बहुतों ने निसंकोच अपने जीवन की दर्द भरी दास्तान बयाँ की  हैं. यह वास्तव में बड़े हिम्मत की बात हैं. वरना अक्सर लोग ऐसी बातों को दबाने में यकीन रखते हैं.

पुरुषों की दुनिया  – अक्सर कुछ लोगों की गलतियों की वजह से सभी  पुरुषों पर प्रश्न चिन्ह लग जाता  हैं. पर यह महाकाव्य पुरुषों की  दुनियाँ के पुरुष कवियों की व्यथा भरी कवितायें भी सुनाता हैं उन्हीं की जुबानी. जिन महिलाओं के साथ दुर्घटनायें होती हैं.उनके परिवार के पुरुषों पर क्या बीतती हैं ?भुक्त भोगी के परिवारों और मित्रों की व्यथाएं  कैसी होती हैं ? क्या कभी ख़याल आया हैं ? उनकी वेदना और व्यथा को कविताओं का रुप दिया हैं, इस संकलन ने.

 प्रेरणा के श्रोत– दुनिया की वह आधी आबादी जिसे हम शक्ति ,दुर्गा , काली , मरियम या मदर मैरी कहते हैं.सभी और अनाम नारी इस महा रचना की प्रेरणा श्रोत हैं.

दो दूर और अलग संस्कृति के  देश के सम्पादको का सम्मिलित प्रयास  – आज़ पूरा विश्व  ग्लोबल या  वैश्विक हो गया  हैं. ऐसे में इस समस्या को  वैश्विव स्तर पर देखने का प्रयास वास्तव में प्रशंसनीय हैं.  यह पुस्तक देश , भाषा , धर्म, सम्प्रदाय, आदि के बंधन से ऊपर उठ कर महिलाओं की अनसुनी आवाज़ को बुलंदी  और हौसला देता हैं.   इस  के दोनों सम्पादक तारीफ़ के हकदार हैं.  चार्ल्स फिश्मैन और  स्मिता सहाय  वे दो नाम हैं.

 2013 में निर्भया ज्योति के गुजरने के बाद से यह वृहद अभियान शुरू हुआ. इसका गर्भ काल लम्बा था. 2016 अप्रैल में  इसका जन्म हुआ और यह पुस्तक सामने  आया. अब यह पुस्तक आमेजन पर उपलब्ध हैं – 25% की छूट के साथ.

विश्व की सर्वश्रेष्ठ कविताओं का खजाना – यह दुनिया के नामी और आम  कविओ के कविताओं का संकलन हैं. यह भुक्तभोगी कवियों  और  कवित्रियों की  दर्द भरी  वास्तविक कविताओं का संकलन हैं. जो पाठकों के दिलों में उतर जाता हैं.

अपने पैरों पर खड़ी  महाकाव्य – इस संकलन की विशेषता हैं , यह आरम्भ से अंत तक बिना किसी सहायता या अनुदान के तैयार की गई  हैं.  आज़ इस बात ज़रूरत हैं कि ऐसी पुस्तकों को शैक्षणिक संस्थानों में स्थान दिया जाये और ग्रांट व  अनुदान से प्रोत्साहित किया जाये. ताकि भविष्य में भी ऐसी पुस्तकें सामने आयें.
वैसे , सम्मान की बात हैं कि निर्भया  से उपजी यह व्यथा कविता संकलन को विदेशों में पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा हैं..

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मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #2

मोबाईल के छुट्टी माँगने के भयंकर सपने से जागते ही मैंने उसे अपने कलेजे से लगा लिया. अब  वह हमेशा मेरे दिल के करीब रहता. शर्ट के ऊपर के पाकेट में उसका आशियाना बन गया.

इतने पर भी मेरे दिल को  तसल्ली नहीँ हुई.  मोबाईल के छुट्टी पर जाने की कल्पना से अक्सर दिल डर से धड़कने लगता. लोगों ने कहा धडकी की बीमारी हो गई हैं मुझे. बड़ा टोना टोटका चला. किसी ने हौलदिल पहनने  कहा. मैं  सीधे डॉक्टर के पास पहुँचा.

दिल का हाल अच्छा नहीँ था. मुझे सख्त आराम का निर्देश देते हुये मेरी दुनिया और मोबाईल से मुझे अलग कर, अस्पताल में भर्ती कर दिया गया.

वहाँ सचमुच मुझे बड़ी शान्ति और सुकून मिला. ना बार बार की घंटी की आवाज़ ना उसे चार्ज करने का तनाव.

घर वापस आ कर  बार बार बजती मोबाईल मुझे बड़ी नागवार गुजरी. तभी मेरे मोबाईल ने बड़े व्यंग से पूछा – क्यों , अब समझ आया ? क्यों मैं छुट्टी माँग रहा था? या फिर से अस्पताल जाने और डाक्टर को पैसे देने की मर्जी हैं ?
  

 (हौलदिल – संग यशब नाम के चौकौर पत्थर के टुकडे   पर कुरान की  एक विशेष आयत खुदी  रहती हैं. इसे रोगोंबाधा  दूर करने के लिये पहना जाता हैं.)

 WHO and various institutions have found   negative effect of excessive use of mobile  on our health.

 

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मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #1

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मैंने जागते के साथ  बंद आँखों से अपने मोबाइल फोन की ओर हाथ बढ़ाया. हाथों में चुभन हुई. मेरी आँखें अपने आप खुल गई. आश्चर्य से देखा. मेरा मोबाइल गुस्से भरी लाल आँखों से मुझे देख रहा हैं. उसके शरीर पर काटें और सिर पर दो सींग उग आये हैं. उसके हाथों में एक बोर्ड हैं. जिस पर लिखा हैं -मेरा  छुट्टी दिवस.

उसने मुझे बड़ी बेरुखी से देखा और पूछा – मेरा रविवार कब हैं ? मुझे भी सप्ताह में एक दिन की छुट्टी चहिये.फिर वह अपने आप ही बुदबुदाने लगा -ना रात देखते , ना दिन. बस काम , काम और काम. मेरी ओर देख कर जोर से बोला -काम की अधिकता से मुझे बर्न   आऊट  सिंड्रोम हो गया हैं और उसकी सारी बत्तियां बुझ गई.

बिना मोबाईल मुझे दुनियाँ अंधकारमय लगने लगा. माथे पर पसीने की बूँदें छलक गई. अब क्या होगा ? सारी बातें तो इसी मोबाईल रूपी काले डब्बे में बंद हैं. मैं मोबाईल उठा पागलों की तरह चुभन के बाद भी बटन दबाने लगा और चिल्लाने लगा -तुम ऐसा नहीँ कर सकते हो.

तभी किसी ने कहा -नींद में इतना शोर क्यों मचा रहे हो ? मैं भयानक सपने से जाग गया.  ख़याल आया बात तो सही हैं. एक दिन फोन को , और हमें फोन से एक दिन की छुट्टी ले कर देखनी चाहिये.

 

 

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