Life is a
choice between a process
of ageing and growing.
Ageing is adding
years to life
while growing is
adding life to years
.
unknown
Life is a
choice between a process
of ageing and growing.
Ageing is adding
years to life
while growing is
adding life to years
.
unknown
Let silence
take you to
the core of life.
Rumi ❤❤
मौन रहना एक साधना है लेकिन सोच समझ कर बोलना एक कला है….
Unknown
थक कर बैठा हूँ…
हार कर नहीं..!!
सिर्फ बाज़ी हाथ से निकली है,
जिंदगी नहीं……

गुलजार
एक दिन रास्ते में मिली वह,
पीछे से काँधे पर हाथ रख कर बोली –
इतनी जल्दी में क्यों हो ?
दो घड़ी बैठ कर सुस्ता लो .
हमने पूछा – कौन हो तुम ?
जवाब मिला – पहचाना नहीं ?
तुम्हें सपने से जगाने ……
तुम्हें तुम से मिलाने आई हूँ.
तुम्हारी हीं ज़िंदगी हूँ ……

कभी कभी समझ नहीं आती ,
क्यों है ज़िंदगी इतनी उलझन भरी ?
जितनी सुलझाओ उतनी
ही उलझती जाती है .
रंग बिरंगे उलझे धागों की तरह
कहीं गाँठे कहीं उलझने हीं उलझने
और टूटने का डर …..
क्या यही है ज़िंदगी ?

Missing Tile Syndrome is a term coined by Dennis Prager. It simply means focusing on the things that we don’t have and in the process, robbing ourselves of happiness.
This Syndrome is a big obstacle towards happiness and blessedness. If you come to think about it, accepting your situation, being thankful and content are the best ways to overcome the Missing Tile Syndrome. Let it not continue to rob your happiness. Thank God for the “tiles” in your life and live a better and happier life.
मिसिंग टाइल सिंड्रोम एक मनोवैज्ञानिक समस्या है जिसमें हमारा सारा ध्यान जीवन की उस कमी की तरफ रहता है जिसे हम नहीं पा सके हैं | जिन्दगी में कितना कुछ भी अच्छा हो, हम उन्हीं चीजों को देखते हैं जो मिसिंग हैं और यही हमारे दुःख का सबसे बड़ा कारण है।
एक बार की बात है एक छोटे शहर में एक मशहूर होटल ने अपने होटल में एक स्विमिंग पूल बनवाया। स्विमिंग पूल के चारों ओर बेहतरीन इटैलियन टाइल्स लगवाये, परन्तु मिस्त्री की गलती से एक स्थान पर टाइल लगना छूट गया। अब जो भी आता पहले उसका ध्यान टाइल्स की खूबसूरती पर जाता। इतने बेहतरीन टाइल्स देख कर हर आने वाला मुग्ध हो जाता। वो बड़ी ही बारीकी से उन टाइल्स को देखता व प्रशंसा करता। तभी उसकी नज़र उस मिसिंग टाइल पर जाती और वहीं अटक जाती…. उसके बाद वो किसी भी अन्य टाइल की ख़ूबसूरती नहीं देख पाता। स्विमिंग पूल से लौटने वाले हर व्यक्ति की यही शिकायत रहती की एक टाइल मिसिंग है। हजारों टाइल्स के बीच में वो मिसिंग टाइल उसके दिमाग पर हावी रहता थी।
कई लोगों को उस टाइल को देख कर बहुत दुःख होता कि इतना परफेक्ट बनाने में भी एक टाइल रह ही गया। तो कई लोगों को उलझन हो होती कि कैसे भी करके वो टाइल ठीक कर दिया जाए। बहरहाल वहां से कोई भी खुश नहीं निकला, और एक खूबसूरत स्विमिंग पूल लोगों को कोई ख़ुशी या आनंद नहीं दे पाया |
दरअसल उस स्विमिंग पूल में वो मिसिंग टाइल एक प्रयोग था। मनोवैज्ञानिक प्रयोग जो इस बात को सिद्ध करता है कि हमारा ध्यान कमियों की तरफ ही जाता है। कितना भी खूबसूरत सब कुछ हो रहा हो पर जहाँ एक कमी रह जायेगी वहीँ पर हमारा ध्यान रहेगा।
टाइल तक तो ठीक है पर यही बात हमारी जिंदगी में भी हो तो ? तो यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या है जिससे हर व्यक्ति गुज़र रहा है।इस मनोविज्ञानिक समस्या को मिसिंग टाइल सिंड्रोम का नाम दिया गया। Dennis Prager के अनुसार उन चीजों पर ध्यान देना जो हमारे जीवन में नहीं है, आगे चल कर हमारी ख़ुशी को चुराने का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं।
ऐसे बहुत से उदाहरण हो सकते हैं जिसमें हम अपनी किसी एक कमी के पीछे सारा जीवन दुखी रहते हैं। ज्यादातर लोग उन्हें क्या-क्या मिला है पर खुश होने के स्थान पर उन्हें क्या नहीं मिला है पर दुखी रहते हैं।
मिसिंग टाइल हमारा फोकस चुरा कर हमारी जिन्दगी की सारी खुशियाँ चुराता है। यह शारीरिक और मानसिक कई बीमारियों की वजह बनता है, अब हमारे हाथ में है कि हम अपना फोकस मिसिंग टाइल पर रखे और दुखी रहें या उन नेमतों पर रखे जो हमारे साथ है और खुश रहें। अपनी स्थिति को स्वीकार करते हुए, जो है उसके लिये आभारी रहना और मिसिंग टाइल सिंड्रोम को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है – अपने जीवन के टाइल्स / खुशियों के लिए भगवान का शुक्रगुज़ार होना।
Time decides
whom you meet in life.
Your heart decides
whom you want in life.
But your behaviour decides
who will stay in your life.

The aim of Positive Psychology is to catalyze
a change in psychology from a preoccupation
only with repairing the worst things in life to
also building the best qualities in life.
~~Martin Seligman
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