चराग़-ए-रहगुज़र

रहगुज़र पर, दूसरों को

इतना भी राह ना दिखाओ.

कि अपनी हीं राह…….

अपनी ही मंज़िल भूल जाओ.

चराग़-ए-रहगुज़र खड़े

रह जाते हैं राहों में.

और कारवाँ ….राही…. गुज़र जातें हैं.

 

अर्थ –

चराग़-ए-रहगुज़र- lamp on the way.

रहगुज़रpath, road.

ज़िंदगी के रंग -168

चाय की प्यालियाँ भी

हमसफ़र और दोस्त हैं,

आने जाने वाले पलों कीं.

कई पल गुज़रे हैं ज़िंदगी के

तुम्हारे और चाय की प्याली के साथ

कभी फीकी, कभी मीठी,

कभी सोन्धी-सोन्धी सी !!

मेहंदी के रंग से लम्हे

जो सिर्फ़ अपनी ख़ुशबू छोड़ गए, काश़ वे लम्हें

मेहंदी के रंगों की तरह हथेलियों में रच बस जाते.

ज़िंदगी के रंग – 159

अपनी मौत से तो अब भी डर नहीं लगता .

पर अपनों को खोने की बात से भी डर लगता है.

जिंदगी के रंग -145

अब क्या लिखें कि तुम्हारे जाने से क्या हुआ ?

अब क्या बताएँ कि तुम्हारे मिलने से क्या हुआ था?

खंडित काव्य में व्यक्त आधा अधूरापन  सा,

हवाओं ने बदला रूख जीवन यात्रा का।

तितिक्षा से…बिन प्रतिकार,

बिना शिकायत, धैर्य से कोशिश है,

भँवर में जो शेष है … बचा है….

उसे बचाने की।

ज़िंदगी के रंग – 78

पल पल …. में है ख़ुशियाँ,

हर पल में है प्यार .

छूट गईं तो बन जाती है यादें .

और अगर जी ली तो बन जाती है ज़िंदगी………

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

ऐ जिंदगी

क्या बेच कर हम

खरीदें फुर्सत,ऐ जिंदगी?

सब कुछ तो गिरवी पड़ा है

जिम्मेदारी के बाजार में.

Unknown

चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता (कविता)

eyes

वह कभी आइने में अपना सुकुमार सलोना चेहरा देखती

कभी अपनी माँ को।

दिल में छाले, सजल नेत्र, कमसिन वयस, अल्पशिक्षित 

  कुछ माह की विवाहिता,

पति के चरित्रहिनता व बदमिजाजी से तंग,

वापस आई पिता ग़ृह, अपना घर मान कर।

माँ ने वितृषणा से कहा – 

पति को तुम पसंद नहीं हो।

तुम्हारा चेहरा नहीं, कम से कम भाग्य तो सुन्दर होता।

वह हैरान थी, माँ तो विवाह के पहले से जानती थी

उसके ससुराल की कलकं-कथा,

अौर कहा था – घबराओ नहीं,

जल्दी हीं सुधर जायेगा। 

“मेहंदी रंग लायेगी” 

फिर आज़ यह उसके  भाग्य अौर चेहरे की बात कहां से आई?

mehndi

 

 

images from internet.