रहगुज़र पर, दूसरों को
इतना भी राह ना दिखाओ.
कि अपनी हीं राह…….
अपनी ही मंज़िल भूल जाओ.
चराग़-ए-रहगुज़र खड़े
रह जाते हैं राहों में.
और कारवाँ ….राही…. गुज़र जातें हैं.

अर्थ –
चराग़-ए-रहगुज़र- lamp on the way.
रहगुज़र– path, road.
रहगुज़र पर, दूसरों को
इतना भी राह ना दिखाओ.
कि अपनी हीं राह…….
अपनी ही मंज़िल भूल जाओ.
चराग़-ए-रहगुज़र खड़े
रह जाते हैं राहों में.
और कारवाँ ….राही…. गुज़र जातें हैं.

अर्थ –
चराग़-ए-रहगुज़र- lamp on the way.
रहगुज़र– path, road.
चाय की प्यालियाँ भी
हमसफ़र और दोस्त हैं,
आने जाने वाले पलों कीं.
कई पल गुज़रे हैं ज़िंदगी के
तुम्हारे और चाय की प्याली के साथ
कभी फीकी, कभी मीठी,
कभी सोन्धी-सोन्धी सी !!

जो सिर्फ़ अपनी ख़ुशबू छोड़ गए, काश़ वे लम्हें
मेहंदी के रंगों की तरह हथेलियों में रच बस जाते.

अपनी मौत से तो अब भी डर नहीं लगता .
पर अपनों को खोने की बात से भी डर लगता है.


अब क्या लिखें कि तुम्हारे जाने से क्या हुआ ?
अब क्या बताएँ कि तुम्हारे मिलने से क्या हुआ था?
खंडित काव्य में व्यक्त आधा अधूरापन सा,
हवाओं ने बदला रूख जीवन यात्रा का।
तितिक्षा से…बिन प्रतिकार,
बिना शिकायत, धैर्य से कोशिश है,
भँवर में जो शेष है … बचा है….
उसे बचाने की।

पल पल …. में है ख़ुशियाँ,
हर पल में है प्यार .
छूट गईं तो बन जाती है यादें .
और अगर जी ली तो बन जाती है ज़िंदगी………

Picture Courtsey: Zatoichi.
क्या बेच कर हम
खरीदें फुर्सत,ऐ जिंदगी?
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है
जिम्मेदारी के बाजार में.

Unknown


images from internet.
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