हम सभी के पास
अपनी -अपनी कहानियाँ हैं…..
हम सब किसी ना किसी दौर से गुजरें हैं।
प्यार, नफरत, पसंद, नापसंद,
पछतावा दर्द , दुःख, खुशी……
जो शायद दूसरे ना समझें।
यह सब तो जीवन के रंग हैं।
जो हमें तोङने के लिये नहीं
जोङने के लिये होते हैं।
हम सभी के पास
अपनी -अपनी कहानियाँ हैं…..
हम सब किसी ना किसी दौर से गुजरें हैं।
प्यार, नफरत, पसंद, नापसंद,
पछतावा दर्द , दुःख, खुशी……
जो शायद दूसरे ना समझें।
यह सब तो जीवन के रंग हैं।
जो हमें तोङने के लिये नहीं
जोङने के लिये होते हैं।
जिंदगी थी खुली किताब,
हवा के झोकों से फङफङाती ।
आज खोजने पर भी खो गये
पन्ने वापस नहीं मिलते।
शायद इसलिये लोग कहते थे-
लिफाफे में बंद कर लो अपनी तमाम जिन्दगी,
खुली किताबों के अक्सर पन्नें उड़ जाया करते है ।