हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।
कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।
हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।
क्या हम आजाद हैं?
या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?
हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।
कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।
हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।
क्या हम आजाद हैं?
या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?
उम्र ने बहुत कुछ बदला –
जीवन, अरमान, राहें…….
समय – वक़्त ने भी कसर नहीं छोड़ी –
मौसम बदले, लोग बदले………
मन में यह ख़्याल आता है –
इतना ख़्याल ना करें, इतना याद ना करें किसी को …..
पर आँखे बंद करते –
मन बदल जाता है, ईमान बदल जाते हैं .
