चाय, किताबें, इश्क़ और तुम

हाथों में गर्म चाय की प्याली औ हम किताबों में गुम।

हो इश्क़ का तरन्नुम औ यादों में तुम।

तब लबों पर थिरक उठती है तबस्सुम,

और आँखों में अंजुम।

चाय, किताबें, इश्क़ और तुम

इन्ही से मिल बनें हैं हम।

अर्थ

अंजुम – सितारे; तारे।

तरन्नुम – स्वर-माधुर्य, गाना, मधुर गान, लय, अलाप।

ख़ामोश किताबें

कुछ लोग होते हैं

ख़ूबसूरत ख़ामोश किताब से।

दमकते सुनहरे अल्फ़ाज़ों में लिखे नाम से।

समय की बहती बयार जब छेड़-छाड कर

खोलती है जिस्म-ए-किताब,

वरक़ दर वरक़, पन्ने दर पन्ने .. …

ख़ुशियों औ ग़म-ए-ज़िंदगी की

खुल जाते है कई हिसाब।

हर एक लफ़्ज़, अल्फ़ाज़ औ

तहरीरे बोल उठतीं है,

गुफ़्तगू कर उठती है दास्तान-ए-ज़िंदगी।

Psychological fact- if we hold things tight

and hide them away . it will burst out

some day. bottled up emotions may affect

the mental health negatively too.