ज़िंदगी के हक़दार हैं हम सब

अक्सर लड़कियाँ को सबक़ – ढके रहना सीखो।

सहना-चुप रहना सीखो, कहना नहीं।

लड़कों के सबक़ होतें हैं – लड़के हो, रोना नहीं,

आँसू नहीं बहाना, ज़िम्मेदार और मज़बूत रहना।

अंदर हीं अंदर घुटती भावनाओं

और दर्द के नासूर का क्या करना?

अपनी तकलीफ़-पीड़ा किसे है बतानी?

अपने लिए खड़े होना कौन सिखायेगा?

सच तो यह है –

भावनाओं और दर्द से भरा बारूद ना बन,

पहले ख़ुद से, अपने दिल-दिमाग़-रूह से प्यार कर।

खुशहाल ज़िंदगी के हक़दार है हम सब।

O MEN PAUSE

देखा है क्या गौर से उसे, महसूस किया है क्या?
वह हर रोज़ बदलती है।
ना यह नज़ाकत, जादू या अदा है उसकी।
यह वह नहीं, हैं उसके हार्मोन।
कभी उसे ख़ूबसूरत, talkative, intuitive
कभी creative, चिड़चिड़ा बनाते।
दर्द-चोट- conflict- aggression से बचती-बचाती,
है ये उसके ज़्यादा responsive दिल-औ-दिमाग़।
मूड on-off, pregnant brain, mommy brain….
पर नहीं उसका क़ाबू।
इतने बदलावों के बाद भी है नाज़ुक, सुकुमार।
ग़र तुमने उसे पढ़ना सीख लिया तो
है खुली किताब वरना पहेली सी।
खुद में ही उलझी, है सरल सर्वोत्तम कृति ख़ुदा की।
जान गए, पहचान गए तो ठीक, वरना है ख़ुदा ही मालिक।
Caution – she is fragile ! handle with care to get the best.

Women goes through adolescence twice,( MEN-O-PAUSE). Primenopause in their 40s is called second adolescence”. It starts around age 43 and reaches its pinnacle by 47/48/52.

लफ़्ज़ और अल्फ़ाज़

कभी ग़ौर किया क्या?

शुक्रिया अदा करते वक्त,

दिल होता है पाक-साफ़।

शिकायतें-शिकवे आते नहीं ज़ेहन में।

एहसानमंद अल्फ़ाज़ों में होती है रूहानियत।

वे नहीं करते दिल दुखाने का गुनाह।

क़ुसूरवार तो होते हैं कड़वे-कृतघ्न दिलों से

निकलते चासनी डूबे, हिजाब ओढ़ें लफ़्ज़।

Gratitude is the healthiest of all human emotions.”

Zig Ziglar

ख़ुशियों भरा बदलाव

एकांत में रम कर समझ आता है,

किसे प्यार है, किसे कहते है ज़रूरत।

एकांत परिचय करता है अपने आप से।

यह पहचान कराता है –

सच्चे अपनों और तथाकथित अपनों से।

ख़ुशियों भरा बदलाव लाता है बाहर से।

धीरे-धीरे अंदर भी बहुत कुछ बदलने लगता है।

मनोवैज्ञानिक तथ्य – जब आप खुद के साथ

ज्यादा समय अकेले बिताने लगते हैं तब आप

अपने साथ-साथ दूसरे की मनःस्थिति बड़ी

आसानी से समझने लगते हैं ।

तहज़ीब

कुछ से दूरी है ज़रूरी,

अपने आप से इश्क़ करने के लिए।

ये तहज़ीब सिखाते है,

ख़ामियों के परे ज़िंदगी देखने की।

आपने भी

कविताएँ है शब्द और भाव।

पहुँचती है दिलों तक तब,

जब कुछ अधूरी ख्वाहिशें कुछ बिखरी,

ज़िंदगी देखी हो आपने भी।

इनका लुत्फ़ मिलेगा तब,

जब कुछ अधुरे अरमान जाग रहे हों,

दिलों की गहराई में।

जहाँ छु सके इन्हें सिर्फ़ शब्दों की गहराइयाँ।

इनसे गुफ़्तगू हो, जुड़ाव महसूस हो।

कुछ अपना सा,

अपनी ज़िंदगी का हिस्सा सा लगे।

वरना तो कविताएँ शब्दों का बुना जाल है।

वक्त की कहानी

यह तो वक़्त वक़्त की बात है।

टिकना हमारी फ़ितरत नहीं।

हम तो बहाव ही ज़िंदगी की।

ना तुम एक से रहते हो ना हम।

परिवर्तन तो संसार का नियम है।

पढ़ लो दरिया में

बहते पानी की तहरीरों को।

बात बस इतनी है –

बुरे वक़्त और दर्द में लगता है

युग बीत रहे और

एहसास-ए-वक़्त नहीं रहता

सुख में और इश्क़ में।

करिश्मा

अर्श का सितारा !

ज़िंदगी सफ़र है

मिलने-बिछड़ने और खोने-पाने का।

कई अपने खो जातें है राहों में।

साथ छोड़ जातें है कई दोस्त बहारों में।

ख़ुद को ना खोना कभी,

किसी को पाने की ज़िद में।

किसी को मनाने की जिद में।

कोई मोल समझे ना समझे,

ना भूलो अपना अनमोल मोल

कि तुम अर्श….आसमान का सितारा हो।

Psychological fact- Self acceptance and self-love are important for living happier and healthier in every aspect of our life.

तुम उस बारिश की तरह हो

जो सोन्धी सी ख़ुशबू बिखेर जाती है।

जो मेरी बालकोनी की फ़र्श आईना बना

मेरा अक्स अपने वजूद में झलका जाती है।

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