तराशते रहें ख़्वाबों को,
कतरते रहे अरमानों को.
काटते-छाँटते रहें ख़्वाहिशों को.
जब अक़्स पूरा हुआ,
मुकम्मल हुईं तमन्नाएँ,
साथ और हाथ छूट चुका था.
सच है …..
सभी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,
किसी को जमीं,
किसी को आसमाँ नहीं मिलता.
तराशते रहें ख़्वाबों को,
कतरते रहे अरमानों को.
काटते-छाँटते रहें ख़्वाहिशों को.
जब अक़्स पूरा हुआ,
मुकम्मल हुईं तमन्नाएँ,
साथ और हाथ छूट चुका था.
सच है …..
सभी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,
किसी को जमीं,
किसी को आसमाँ नहीं मिलता.
Helen Keller
रात गवाई सोए के, दिवस गवाया खाए।
हीरा जन्म अमोल सा , कोड़ी बदले जाए।
व्याख्या – इंसान अपनी जिंदगी को रात में सोने में व् दिन में खाने में गुजार देता है।
इस तरह वह इस हीरे जैसे जन्म को कोड़ी में बदल देता है।
कहने का भाव है कि जिंदगी को बेकार में व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
English meaning – A man spends his life in sleeping and eating.
He doesn’t do anything worth-doing.
In this way he whiled away this gem-like-life
and converted it into a cowery ( a worthless thing).
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~Kabir
रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय
टूटे से फिर ना जुड़े जुड़े गांठ परि जाये
– रहीम
अर्थ- रहिम कहते हैं कि प्रेम का धागा नहीं तोड़ना चाहिए
क्योंकि यह फिर नहीं जुड़ता
और जुड़ता है तो उसमें गांठ पड़ जाती है)
Meaning – Don’t snap off the thread of love,
For once broken,
it can’t be joined, and though joined it leaves a knot.
Rahim
सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,
याद दिलातीं हैं – बचपन की,
बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।
नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,
पर अब ङूबे हैं जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।
तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।
अब समझदार माँझी
कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा
तलाशता है सुकून-ए-साहिल।
कबीरदास का हिंदी दोहा ब्लॉगर स्वामी येसूदास के विशेष अनुरोध पर –
Meaning – Love does not grow on trees
or brought in the market,
but if one wants to be “loved”
one must first know
how to give unconditional love.
Posting Kabir’s Hindi couplet/ doha along with its meaning on the request of Blogger Swamiyesudas, a Christian Sannyasi, passionately interested in creating a Better World.
दुनिया में होङ लगी है आगे जाने की…
किसी भी तरह सबसे आगे जाने की।
कोई ना कोई तो आगे होगा हीं।
हम आज जहाँ हैं,
वहाँ पहले कोई अौर होगा….. उससे भी पहले कोई अौर।
ज़िंदगी सीधी नहीं एक सर्कल में चलती है।
जैसे यह दुनिया गोल है।
ज़िंदगी का यह अरमान, ख़्वाब –
सबसे आगे रहने का, सबसे आगे बढ़ने का……
क्या इस होड़ से अच्छा नहीं है –
सबसे अच्छा करने का।
Image courtesy- google.
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