परिवर्तन

हिरोशिमा

क्यों नहीं मानते हैं इसे?

लिटल बॉय ऐटम बम और

दूसरे विश्व युद्ध की विभीषिका को

क्यों याद नहीं करते?

ऐसी भयानकता याद कर शायद विश्व,

ना बढाये तीसरे विश्व युद्ध की ओर कदम।

6 August, Hiroshima Day- During world war 2, 1945 an atom bomb was dropped on Hiroshima, Japan. It killed more than 200000 people in few seconds and number of people got injured and disabled.

religion of solitude

The more powerful

and original a mind,

the more it will incline

towards the

religion of solitude.

~ Aldous Huxley

मृत यादें

मृत यादें मर कर भी दर्द देतीं है।

ग़र अतीत के घाव नहीं भरे

तो वे रिसते रहेंगे।

यादों के दाग,

ज़ख्मों के जलन

अपने होने का एहसास देते रहेंगे।

अतीत से समझौता कर

आगे निकल जाना ज़रूरी है।

एहसास !

दिल में दबा दर्द मुस्कुराहटों की ओट में पनाह लेता है।

मुस्कुराहटें आँखों के आँसुओं के नमी

के पीछे लुका-छिपी करती है।

क्यों एहसासों को छुपाने का चलन ज़माना सिखाता है?

दिल पर बोझ बढ़ाना सिखाता है?

वही आँखें, वही मुस्कान जो राज़दार बनती हैं,

वही दर्द-ए-दिल राज़ खोल देतीं हैं।

नासूर नहीं इलाज-ए-दर्द चाहिए।

Psychological Fact – Don’t Bury Your Feelings. Being in touch with your feelings will make you a better person, as well as a better parent and partner. Being true to your emotions can make you feel better about yourself.

तलाश अपनी

तलाश थी अपनी, ढूँढते रहे

दहर…दुनिया के ज़र्रे-ज़र्रे में।

दिल के अंदर से आई आवाज़,

कस्तूरी मृग ना बन,

जो अपनी ही ख़ुशबू खोजता रहता है बाहर।

झाँक अपने अंदर।

हृदय के अंदर, रिक्त आकाश में है

असल तू, तेरा दहर ( शिव या ब्रह्म अंश)।

गुफ़्तगू कर उससे।

आईने सा नज़र आएगा अक्स तेरा।

चिदानंद रूपः शिवोहम शिवोहम!

शब्दार्थ- दहर- दुनिया, दहर – शिव या ब्रह्म अंश

शुभ शिवरात्रि !

Happy Shivratri – I am not the ether, nor the earth, nor the fire, nor the wind (the five elements). I am indeed, That eternal knowing and bliss, the auspicious (Shivam), love and pure consciousness.

ज़िंदगी के शतरंज

ज़िंदगी के शतरंज पर

सम्बंधों की गोटियाँ ना खेलो।

ग़र किसी की ज़्यादती

बिना जवाब दिए झेल गए,

तब जवाब ऊपरवाला देता है।

महाभारत रचने में महारत रखने वालों

का भी यही हश्र हुआ था।

हम सबसे ज़्यादा अपने हैं !

करो इश्क़ हर साँसों से,

साँसे ज़िंदगी…ताक़त है हमारी।

किसी और के फ़िक्र में ना टूटने दो दिल,

दिल अपना है।

चोट ना लगने दो अपने अंतरात्मा को।

रूह तुम्हारी है,

किसी भीड़ में ना गुम होने दो अपने आप को,

जब टूटने लगो ज़िंदगी में, ठहर कर,

एक गहरी साँस लो और आइने

में निहारो अपने आप को।

याद रखो, हम सबसे ज़्यादा अपने हैं।

कर्म

जब हौसला अफजाई कम

और व्यंग बाण ज़्यादा हो जायें,

मायने बुलंदियाँ क़रीब हैं।

लोगों की निगाहे उठने लगें,

पैर नीचे खिंचने वाले बढ़ जायें,

मायने आसमाँ क़रीब है।

जब दोस्तों से दुश्मन ज़्यादा हो जायें।

लोगों की निगाहों में चढ़ने लगो।

मायने फ़लक के सितारे क़रीब हैं।

बस सब्र रखो, क्योंकि हर किसी के,

कर्म का नतीजा ज़रूर सामने आता है।

बूँद-बूँद