ज़िंदगी के रंग- 218

ज़िंदगी के रंग – 217

ज़िंदगी के देखे कई रंग,

कई बसंत !

सतरंगी ज़िंदगी ने सिखाया बहुत कुछ।

कभी हँसाया कभी रुलाया।

आज जहाँ खड़े हैं,

आप सब के साथ ।

वह है उम्र किस्टलाइस्ड इंटेलिजेन्स का,

अनुभव और समझदारी की वह उम्र जहाँ बस चाहत है,

खुश रहने की!

खट्टी-मीठी ज़िंदगी की राहों को ख़ुशियों के साथ तय करने की।

अब दुनिया और काम में

वक्त के साथ छूटते, भूलते जा रहे अपनों के साथ

बैठ कर वक्त भूलने की चाहत है।

ज़िंदगी के रंग – 222

ज़िंदगी की राहों में लोग

रूठते-छूटते रहते हैं।

कुछ अपनों के अपना होने के

भ्रम टूटते रहतें हैं।

अँधेरे पलों में कुछ सच्चे अपने,

दमकते सितारों से,

ज़िंदगी में जुटते रहतें हैं।

गंगा- कब हमारी नींद खुलेगी?

अभी तक इस पर समस्यापर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? जो अब सारी दुनिया में दिखाई जा रही है। यह अफ़सोस की बात है।

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Please watch this video – Covid threat to India’s holiest river Close

 

मैं क्यों आई धरा पर? #गंगाजयंती/गंगासप्तमी 18 मई

हिमालय से लेकर सुन्दरवन तक की यात्रा करती,

पुण्य, सरल, सलिला, मोक्षदायिनी गंगा,

 हमेशा की तरह पहाड़ों से नीचे पहुँची मैदानों का स्पर्श कर हरिद्वार !

कुम्भ की डुबकी में उसे मिला छुअन कोरोना का।

आगे मिले अनगिनत कोरोना शव।

वह तो हमेशा की तरह बहती रही

कोरोना वायरस

जल पहुँचाती घाट घाट!

जो दिया उसे, वही रही है बाँट!

किनारे बसे हर घर, औद्योगिक नगर, हर खेत और पशु को।

शुद्ध, प्राणवायु से भरी गंगा भी हार गई है मानवों से।

सैंकड़ों शवों को साथ ले कर जाती गंगा।

हम भूल रहें हैं, वह अपने पास कुछ भी  रखती नहीं।

अनवरत बहती है और पहुँचाती रही है जल।

अब वही पहुँचाएगी जो इंसानों ने उसे दिया।

कहते हैं गंगा मां  के पूजन  से  भाग्य खुल जाते हैं।

पर उसके भाग्य का क्या?

  ख़्याल उसे आता होगा मगर।

स्वर्ग छोड़ मैं क्यों आई धरा पर ?

 

( एक महीना  पहले यह  कविता मैंनें लिखी थी। इस खबर पर

आप के विचार सादर आमंत्रित हैं। गंगा अौर यह देश आप सबों का भी है। )

आदत !!

मौन

स्टिग्मा / कलंक ?- Banished for Bleeding!

BBC NEWS- पश्चिमी भारतीय राज्यों में “पीरियड हट्स” जहां हजारों आदिवासी महिलाओं और लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान निर्वासित किया जाता है।

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पता नहीं कब हम बदलेंगे?

सदियाँ गुजर गईं।

ना जाने कितने नए दौर आए।

ईश्वर प्रदात महिलाओं की सबसे बड़ी रचनात्मकता हीं

उनका स्टिग्मा है।

कब बदलेंगे हम?

 

शुभ बुद्ध पूर्णिमा Happy Buddh Purnima!

“If you light a lamp for somebody, it will also brighten your path.”

बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार बैसाख पूर्णिमा को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महात्मा बुद्ध का जन्म इस दिन हुआ था। जहां हिंदू धर्म के लोग इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं, वहीं बौद्ध धर्म के लोग इस दिन बौद्ध जयंती मनाते हैं।

Buddha’s Birthday is celebrated on Buddhu Purnima, it is celebrated on the full moon day of the Vaisakha month According to Buddhist tradition and modern academic consensus, Gautama Buddha was born c. 563–483 BCE in Lumbini (what is now Nepal) and raised in the Shakya capital of Kapilavastu.

कोरोना से संघर्षरत हिंदुस्तान

Don’t shoot them with your camera !

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यह कोरोना से थका-हारा, संघर्षरत हिंदुस्तान है।

मैदाने-जंग या फ़ोटोग्राफ़ी कॉम्पटिशन  नहीं!

गिद्ध और नन्ही  बच्ची की तस्वीर से

पुलित्ज़र पुरस्कार जीतने वाला

रॉबर्ट हेडली भी अपने अपराध बोध से जीत नहीं पाया।

सोंचो वास्तव में गिद्ध कौन है?

 

यहाँ सब ने किसी ना किसी को खोया है।

मदद करो!

पेश आओ  सहानुभूति और हमदर्दी से।

 

महाप्रलय !!

World’s largest iceberg breaks off from Antarctica !

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महाप्रलय… जल मग्न धरा पर

बच गए अकेले मानव मनु।

है जानते यह कथा सब ।

गलते-टूटते विशालकाय हिम खंड

क्या वही इतिहास दोहराएँगे?

 आज ये आइसबर्ग खबरें हैं,

क्या कल हम सब खबरें बन जाएँगे?