मेरी नई किताब – वंदना My latest book- Vandana

मेरी नई किताब आज पब्लिश हुई है।

यह Notion press में उपलब्ध है।link 👇🏻

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स्याह रात

जाड़े की सुबह बादलों

से लुकाछुपी खेलती

सुनहरी धूप सरकती,

पैरों तक आ उसे

गुनगुना कर गई।

ख़ुश-गवार, फ़िज़ा परिंदों

की चहचहाहट…. हर सुबह

एक नई रंग ले कर आती है।

स्याह रात के ख़िलाफ़

जंग जीत कर आती है।

दिल की बातें

अक्सर ज़ुबान पर लगे

सयंम के पहरे स्याह पलों

में बिखर जातें है।

दिल की गहराइयों में

छुपी बातें, लबों पर

बेबाक़ी से छलक आतीं हैं।

दिल से दिल की बातें

करनी हो तो चरागों के

जश्न से बेहतर अँधेरे हैं।

मनोवैज्ञानिक तथ्य– देर रात को बात करने पर ज्यादातर लोग सच बोलते हैं, क्योंकि रात को दिमाग थका हुआ होने के कारण ज्यादा नहीं सोच पाता है।

Psychology says – Night Is The Best Time To Have A Deep Conversation With Someone, According To Experts

ठहराव

तकरार औ इकरार हो,

शिकवे और गिले भी।

पर ठहराव हो, अपनापन,

भरोसा और सम्मान हो,

ग़र निभाने हैं रिश्ते।

वरना पता भी नहीं चलता।

आहिस्ता-आहिस्ता,

बिन आवाज़

बिखर जातें हैं रिश्ते,

टूटे …. शिकस्ते आईनों

की किर्चियों से।

इंद्रधनुष

दिव्य प्रेम के जश्न,

रास में डूब,

राधा इंद्रधनुष के रंगों से

नहा कर बोली कान्हा से –

हम रंगे हैं रंग में तुम्हारे।

रंग उतारता नहीं कभी तुम्हारा ।

कृष्ण ने कहा- यह रंग नहीं उतरता,

क्योंकि

राधा ही कृष्ण हैं और

कृष्ण ही राधा हैं।

गोपाल सहस्रनाम” के 19वें श्लोक मे वर्णित है कि महादेव जी देवी पार्वती जी को बतातें है कि एक ही शक्ति के दो रूप है – राधा और माधव(श्रीकृष्ण)।यह रहस्य स्वयं श्री कृष्ण ने राधा रानी को भी बताया। अर्थात राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं।

इम्तहान

कई बार लगता है,

ऊपर वाला कुछ

लोगों को ज़िंदगी में

हमारा इम्तहान

लेने भेजता हैं।

जब तक हम अपने लिए

हौसले के साथ खड़ा होना

नहीं सीख लेते।

यह इम्तहान चलता रहता है।

ज़िंदगी के रंग -228

ज़िंदगी रोज़ एक ना एक

सवाल पूछती है।

सवालों के इस पहेली में

उलझ कर, जवाब ढूँढो।

तो ये सवाल बदल देती है।

ज़िंदगी रोज़ इम्तहान लेती है।

एक से पास हो या ना हो।

दूसरा इम्तहान सामने ला देती है।

अगर खुद ना ले इम्तहान,

तो कुछ लोगों को ज़िंदगी में

इम्तहान बना देती है।

बेज़ार हो पूछा ज़िंदगी से –

ऐसा कब तक चलेगा?

बोली ज़िंदगी – यह तुम्हारा

नहीं हमारा स्कूल है।

तब तक चलेगा ,जब तक है जान।

बस दिल लगा कर सीखते रहो।

समुंदर की लहरें

समुंदर की लहरें,

जमीं का ज़ख़्म भरने की

कोशिश में मानो बार बार

आतीं-जातीं रहतीं है।

वक्त भी घाव भरने की

कोशिश करता रहता है।

ग़र चोट ना भर सका,

तब साथ उसके

जीना सिखा देता है।

ज़िंदगी का सफ़र

ज़िंदगी के सफ़र में लोग आते हैं।

कुछ दूर कुछ साथ निभाते हैं।

कुछ क़ाफ़िले में शामिल हो

दूर तलक़ जातें हैं।

कुछ मुस्कान और कुछ

आँसुओं के सबब बन जातें हैं।

कुछ ख़्वाबों में बस कर

रह जातें हैं।

रौशनी

जिस रौशनी को

हम खोज रहें हैं।

वह तो है हमारे अंदर।

हम सब हैं,

चमकते-दमकते सितारें

इस ख़ूबसूरत काया

के अंदर।