Author: Rekha Sahay
जहाँ खारा पानी बिकता है # mumbaislum ( कविता )
वह भी रहती हैं वहाँ
जहां खारा पानी बिकता है।
दरिद्र, पति परित्यक्ता,
दस बच्चों के साथ,
दशकों पुरानी अपनी
बावड़ी का जल बाँट कर
कहती है –“ पानी बेच कर क्या जीना?
क्या पूजा सिर्फ मंदिरों और मस्जिदों में ही होती है ?
यह इबादत का उच्चतम सोपान नहीं है क्या?
(मुंबई, मानखुर्द बस्ती में जहाँ गर्मी में लोग पानी खरीद रहे हैं। वहाँ ज़रीना अपनी पुरानी बाबड़ी का द्वार सभी के लिए खोल रखा है। ) news from daily – HINDU, pg – 2 dated may 12 2016.
मैं एक लड़की ( कविता 1 )
इस दुनिया मॆं मैने
आँखें खोली.
यह दुनिया तो
बड़ी हसीन
और रंगीन है.
मेरे लबों पर
मुस्कान छा गई.
तभी मेरी माँ ने मुझे
पहली बार देखा.
वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया
और बोली -लड़की ?
तभी एक और आवाज़ आई
लड़की ? वो भी सांवली ?
जिंदगी के रंग ( कविता) 8
जिंदगी ने ना जाने कितने रंग बदले।
रेगिस्तान के रेत की तरह
कितने निशां बने अौर मिटे
हर बदलते रंग को देख ,
दिल में तकलिफ हुई।
काश, जिंदगी इतनी करवटें ना ले।
पर , फिर समझ आया ।
यही तो है जिंदगी।
मोक्ष -कविता
नचिकेत और यम का संवाद
Kathy Upanishad was written by achary Kath. It is legendary story of a little boy, Nachiketa who meets Yama (the Indian deity of death). Their conversation evolves to a discussion of the nature of mankind, knowledge, Soul, Self and liberation.
आचार्य कठ ने उपनिषद रचना की। जो कठोपनिषद कहलाया। इस में नचिकेत और यम के बीच संवाद का वर्णन है । यह मृत्यु रहस्य और आत्मज्ञान की चर्चा है।
विश्वजीत यज्ञ किया वाजश्रवा ने ,
सर्वस्व दान के संकल्प के साथ।
पर कृप्णता से दान देने लगे वृद्ध गौ।
पुत्र नचिकेत ने पिता को स्मरण कराया,
प्रिय वस्तु दान का नियम।
क्रोधित पिता ने पुत्र नचिकेत से कहा-
“जा, तुझे करता हूँ, यम को दान।”
नचिकेत स्वंय गया यम के द्वार ।
तीन दिवस भूखे-प्यासे नचिकेत के
प्रतिबद्धता से प्रसन्न यम ने दिया उसे तीन वर ।
पहला वर मांगा -पिता स्नेह, दूसरा -अग्नि विद्या,
तीसरा – मृत्यु रहस्य और आत्मा का महाज्ञान।
और जाना आत्मा -परमात्मा , मोक्ष का गुढ़ रहस्य.
यज्ञ किया पिता ने अौर महाज्ञानी बन गया पुत्र ।
रौशन जहाँ -कविता
माँ के गर्भ में अजन्मा शिशु अपने
को सुरक्षित समझ ,बाहर आने पर
रोता हैं.
इस दुनिया को अपना घर मान
इंसान भी , इसे छोड़ने के
डर से रोता हैं.
क्यों यह नहीँ सोचता ?
आगे रौशन और भी “जहाँ ” हैं.
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Book launch photos of Veils Halos and Shackles.
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I captured the book launch of Veils Halos and Shackles – an anthology of poems. It features poets from across the globe. It was a very exciting evening for me – my first assignment to shoot a book launch. At Gyan Abad, Pune Chief guest, Bina Sarkar Ellias and other guests Unveiling Veils […]
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गीता , कुरआन , बाइबल -कविता
रोशनी -कविता

रोशनी पड़ने से जगमगा उठा,
रास्ते में पड़ा कंकड़….
मैंने झुक कर उठा लिया उसे.
तभी ऊपर वाले की
आवाज़ आई.-
जिस रोशनी से यह बेजान पत्थर चमक उठा.
वह तुम पर भी तो पड़ रहीं हैं.
क्यों नहीँ अपने को चमकाते और
ऊपर उठाते हो ?
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मेरे मंदिरों में – कविता
मेरे मंदिरों में भी तुम सब
करते हो मोल -तोल.
कभी पुजारी और कभी भक्त बन कर.
बड़े पक्के हो ,
व्यापर करने में.
लेकिन क्या जानते हो ,
अपना अनमोल मोल ?
जो बिना किसी मोल -भाव
मैंने तुम्हें दिया ?
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