काबिले तारीफ़

उनका क्या जो अपनी गलतियों को मन बहलावा कहते हैं और दूसरे की गुनाह।

अहमियत होती है हर खता के सज़ा की, लेकिन

ऐसी सजा जो जुर्म के साथ सही बैठे लाजवाब है ।

बार गर्ल्स पर उड़ाए नोट, तो 47 को दी कोर्ट ने ऐसी अनूठी सजा. सजा की राशीअनाथालय को भुगतान करने के लिए मुंबई की अदालत से कहा.

Caught for showering notes on bar girls, 47 men told by Mumbai court to pay orphanage

Inside you !!

Do not

feel lonely,

the entire universe

is inside you.”

❤  Rumi

ज़िंदगी के रंग -132

सुबह की छलकती रौशनी

के साथ खिलखिलाई खुशी,

धीरे से कानों में फुसफुसाई-

हम तुम्हे ढूँढ़ते रहें हैं

तुम हमें ढूँढ रही हो?

नज़रें उठाओ , देखो …..

हम तुम्हारे आस पास है

हर छोटी चीज़ में ….

Chains of birth and death.

Love is from the infinite,and will remain until eternity.
The seeker of love escapes the chains of birth and death.
Tomorrow, when resurrection comes,
The heart that is not in love will fail the test.

Rumi ❤ ❤

एक नन्ही परी ( कन्या भ्रुण हत्या पर आधारित मार्मिक कहानी )

Rekha Sahay's avatarThe REKHA SAHAY Corner!

ff1

विनीता सहाय गौर से कटघरे मे खड़े राम नरेश को देख रही थीं। पर उन्हे याद नहीं आ रहा था, इसे कहा देखा है? साफ रंग, बाल खिचड़ी और भोले चेहरे पर उम्र की थकान थी। साथ ही चेहरे पर उदासी की लकीरे थीं।वह कटघरे मे अपराधी की हैसियत से खड़ा था।वह आत्मविश्वासविहीन था।

लग रहा था जैसे उसे दुनिया से कोई मतलब ही नहीं था। वह जैसे अपना बचाव करना ही नहीं चाहता था।कंधे झुके थे।शरीर कमजोर था। वह एक गरीब और निरीह व्यक्ति था। लगता था जैसे बिना सुने और समझे हर गुनाह कबूल कर रहा था। ऐसा अपराधी तो उन्होंने आज तक नहीं देखा था। उसकी पथराई आखों मे अजीब सा सूनापन था, जैसे वे निर्जीव हों।

लगता था वह जानबूझ कर मौत की ओर कदम बढ़ा रहा था। जज़ साहिबा को लग रहा था- यह इंसान इतना निरीह है। यह किसी का कातिल नहीं हो सकता…

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जब हम साथ पढ़ते थे…..

#After37Years

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जब हम एक साथ पढ़ते थे.

ना जाने क्या क्या शरारत करते थे .

लड़ते थे झगड़ते थे.

पर पल में भूल नाचते-गाते, पढ़ते- लिखते,

शाररत भरे गुल खिलाते थे.

अपने प्रिय टीचरों के बदले आए अनजान

टीचरों का चेहरा देख हमारे चेहरे उतर जाते थे.

दिमाग़ में शैतानियाँ भरे बादल घिर आते थे .

नय टीचरों को छकाते और सताते थे.

और परीक्षा आते भगवान याद आते थे .

जब हम सब साथ थे कभी नहीं सोचा

इन मित्रों से मिलने में इतने साल निकल जाएँगे.

जीवन की इतनी यात्राओं के बीच

ना जाने दुनिया में क्या-क्या बदल गया .

ज़िंदगी ने कितने रंग दिखाये.

कभी चले थे यहाँ से ज़िंदगी की राह पर.

आज वापस इस पड़ाव पर,

पीछे मुड़ कर देखने पर

वह जीवन किसी सिनेमा सा दिखता है.

पर तसल्ली है …….खुशी है…..

बिना क़समें खाए , बिना कुंडली मिलाए भी

तुम सब आज ज़िन्दगी में वापस आ गए .

सबका वापस मिलना बड़ा सुकून भरा है .

dedicated to all friends.

सभी मित्रों को समर्पित

मजहब

कृपया बीच वाली पीली पट्टी पढ़ें । समस्त राज्यों के लिए एक ही नारा ! जिस किसी ने भी यह बनाया है उसकी बुद्धिमत्ता की दाद देनी पड़ेगी .

Forwarded as received.

अजेय जीत

गहनतम अंधकार भी हल्की सी

रोशनी की किरण से हार जाता है .

अपने आप को पहचानो …..

अपने अंदर के अंधकार को हराओ .

दूसरे को जीत कर क्या करोगे ?

जीतना है तो अपने आप को जीतो .

Be calm

Learn this from water:

loud splashes the brook

but the oceans depth

are calm.

Buddha 🌈