
राहों की दस्ता

“The Whole Is Greater Than The Sum Of Its Parts”. Likewise, The Cornucopian half of this blog encompasses my blog in its entirety which otherwise is scattered into the myriad hats I wear creatively!!




काव्य प्रतियोगिता में विजेता रही डॉ. रेखा रानी की हृदयस्पर्शी कविता ‘जिंदगी के अनदेखे तमगे’। यह कविता जीवन के संघर्षों, तकलीफों और मानवता के गहरे पाठ को खूबसूरती से दर्शाती है।
🏆काव्य प्रतियोगिता में विजयी!🏆
मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि “India’s Biggest Book Giveaway – काव्य प्रतियोगिता” में मेरी इस कविता को शीर्ष 5 विजेताओं में चुना गया है। आप सभी के प्रेम, प्रोत्साहन और समर्थन के लिए हृदय से आभार!

( कविता – मानवता )
ऊंची पथरीली चट्टानों,
शैल-शिखरों पर उगने वाले
दरख़्तों की जड़े
वक्त की सख्त मार,
तूफानों के थपेड़े सह,
वक्त से पहले जिम्मेदार
गहरी मजबूत हो जाती है।
❖ ❖ ❖
जिंदगी भी कुछ यूं ही,
चोटें, जख्म, तकलीफें दे
फना होने की हद तक आजमाती है।
जो इन तमाम दर्दों से उठकर
आगे बढ़ता है,
उसकी जड़ें भी गहरी, मजबूत हो जाती हैं।
वे दूसरों के संघर्षों को
समझना और सम्मान देना सीख जाते हैं।
❖ ❖ ❖
जीवन के थपेड़े सहकार,
गिर कर भी जो संभल जाएं,
उनके कदमों को फिर
कोई तूफान डिगा नहीं सकता।
बेरहम वक्त की मार से बने
ये जख्म और उनके निशान ही असल में
जिंदगी के पाठ और अनदेखें तमगे हैं।
~ डॉ. रेखा रानी





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