ज़िंदगी के रंग – 222

ज़िंदगी की राहों में लोग

रूठते-छूटते रहते हैं।

कुछ अपनों के अपना होने के

भ्रम टूटते रहतें हैं।

अँधेरे पलों में कुछ सच्चे अपने,

दमकते सितारों से,

ज़िंदगी में जुटते रहतें हैं।