फीकी चाय

ना है  चाँद-सितारे तोड़ लाने की फ़रमाइश।

ना हीरे-मोती, गहने, पाजेब चाहिेए। 

नहीं चाहिये गुलाब, कमल, गेंदे या अमलतास।

वापस आ सकोगे क्या?

अकेले चाय पीते-पीते दिल उब सा गया है।

बस एक कप फीकी चाय का साथ चाहिए ।

12 thoughts on “फीकी चाय

  1. उफ़ ! समझ में तो आ गए आपके इन अल्फाज़ में छुपे आपके ज़ज़्बात । पर क्या कहूं ? दर्द के दरिया को आख़िर पनाह कहाँ मिलती है, आप जानती ही होंगी ।

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    1. मन की बातें कभी कभी दिल में बड़ा हलचल पैदा करने लगतीं हैं। तब मुझे किसी से कुछ कहने – बताने से ज़्यादा सरल लगता है , उसे लिख देना।
      आपका आभार।

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