ज़िंदगी के रंग- 89

एक टुकड़ा ज़िंदगी का

बानगी है पूरे जीवन के

जद्दोजहद का .

उठते – गिरते, हँसते-रोते

कभी पूरी , कभी स्लाइसों

में कटी ज़िंदगी

जीते हुए कट हीं जाती है .

इसलिए मन की बातें

और अरमानों के

पल भी जी लेने चाहिये.

ताकि अफ़सोस ना रहे

अधूरे हसरतों ….तमन्नाओं …. की.

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