ज़िंदगी के रंग – 85

रिश्ते ईमानदारी से

निभाए जाय तो नियामत हैं ,

वरना बोझ बन जाते हैं.

क्योंकि कोई भी रिश्ता

एक तरफ़ा नहीं निभता हैं.

वैसे ही जैसे ताली

एक हाथ से नहीं बजती .

 

10 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 85

      1. रेखा जी आपने बहुत समय से कोई कहानी नही लिखी। आपकी कहानिया मुझे काफी पसंद है। इंतजार रहेगा।

        Liked by 1 person

      2. बहुत धन्यवाद इस प्यारे से अनुरोध के लिए गायत्री जी . समयाभाव के कारण अधूरी लिखी कहानियों को पूरा नहीं कर पा रहीं हूँ . पर कोशिश करूँगी जल्दी पूरा करने कीं .

        Like

Leave a reply to Nidhi Cancel reply