ज़िंदगी के रंग – 82

हर सच्चा विचार ……

पॉज़िटिव विचार …….

वह मौन प्रार्थना है

जो जीवन और जीवन का अर्थ बदल देती है .

2 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 82

  1. आज तक समझ न आया
    जीवन क्या है?
    उम्र बढ़ता गया
    क्लास बदलते गये
    चेहरे बदलते रहे
    मैं भी बदलता रहा

    खुद का रंग बदलने चला
    बाद में जाना अपना रंग ही सच्चा था…

    गलत सही के चक्कर में जवानी खो दिया
    यह भी बाद में जाना ..कुछ भी गलत नहीं होता
    कुछ भी सही नहीं होता
    जो सही है ,वो गलत भी है
    और जो गलत है वो सही भी है..

    दोस्तों से आगे निकलता गया
    इतना आगे आ गया
    और तन्हा ही हो गया
    अब सोचता हूं
    दोस्तों का हुजूम भी अच्छा था..

    अब तक समझ न आया जीवन क्या है?

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