ज़िंदगी के रंग – 82 August 3, 2018August 11, 2018 Rekha Sahay हर सच्चा विचार …… पॉज़िटिव विचार ……. वह मौन प्रार्थना है जो जीवन और जीवन का अर्थ बदल देती है . Rate this:Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn Share on Pocket (Opens in new window) Pocket Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like Loading... Related
आज तक समझ न आया जीवन क्या है? उम्र बढ़ता गया क्लास बदलते गये चेहरे बदलते रहे मैं भी बदलता रहा खुद का रंग बदलने चला बाद में जाना अपना रंग ही सच्चा था… गलत सही के चक्कर में जवानी खो दिया यह भी बाद में जाना ..कुछ भी गलत नहीं होता कुछ भी सही नहीं होता जो सही है ,वो गलत भी है और जो गलत है वो सही भी है.. दोस्तों से आगे निकलता गया इतना आगे आ गया और तन्हा ही हो गया अब सोचता हूं दोस्तों का हुजूम भी अच्छा था.. अब तक समझ न आया जीवन क्या है? LikeLiked by 2 people Reply
आज तक समझ न आया
जीवन क्या है?
उम्र बढ़ता गया
क्लास बदलते गये
चेहरे बदलते रहे
मैं भी बदलता रहा
खुद का रंग बदलने चला
बाद में जाना अपना रंग ही सच्चा था…
गलत सही के चक्कर में जवानी खो दिया
यह भी बाद में जाना ..कुछ भी गलत नहीं होता
कुछ भी सही नहीं होता
जो सही है ,वो गलत भी है
और जो गलत है वो सही भी है..
दोस्तों से आगे निकलता गया
इतना आगे आ गया
और तन्हा ही हो गया
अब सोचता हूं
दोस्तों का हुजूम भी अच्छा था..
अब तक समझ न आया जीवन क्या है?
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बेहद ख़ूबसूरत प्रासंगिक कविता लिखा राज . बहुत धन्यवाद .
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