खुशियाँ और ख्वाहिशें

छोटी छोटी खुशियाँ ही तो

जीने का सहारा बनती है ।

ख्वाहिशों का क्या वो तो

पल पल बदलती है ।

 

 

 

Anonymous

12 thoughts on “खुशियाँ और ख्वाहिशें

  1. ठीक ही तो है रेखा जी । बहुत पहले आने वाले एक टीवी धारावाहिक – ‘हसरतें’ का गीत याद दिला दिया आपने : ‘हसरतें ही हसरतें हैं, और क्या है ? ज़िंदगी का नाम ये ही दूसरा है’ । इस गीत का अंतरा है : ‘ये न हो ऐसा कभी होता नहीं, वरना फिर कोई यहाँ हँसता नहीं, रोता नहीं’ ।

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