बातो में खुशबू
कभी कभी ही महसूस होती है
जैसे कच्चे गुलाबे इत्र की महक हो फैली हर ओर .
यह हवा के झोंके से बिखरती नहीँ
कहीँ गहरे दिल में
खजाने बन जमा हो जाती हैँ .
यादों के गुलाब बन कर .
बातो में खुशबू
कभी कभी ही महसूस होती है
जैसे कच्चे गुलाबे इत्र की महक हो फैली हर ओर .
यह हवा के झोंके से बिखरती नहीँ
कहीँ गहरे दिल में
खजाने बन जमा हो जाती हैँ .
यादों के गुलाब बन कर .
क्या कहना।।। बहुत खूब।।
जिधर हवा खुशबू उस ओर जाती है,
मिटकर भी फूल खुशबू छोड़ जाती है,
आते हैं अक्सर ऐसे फूल भी जीवन में,
आँधी,तूफान जिसे मिटा नही पाती है,
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आप बहुत अच्छा लिखते हैं। मैं अभिभूत हो गई इस सुंदर कविता से । तहे-दिल से शुक्रिया।
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Abhaar apka….
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Aabhar aapka, kyoki aapki likhi antim panktiyon ne jaise meri kavita ke bhavo ko spasht kar diya —
आते हैं अक्सर ऐसे फूल भी जीवन में,
आँधी,तूफान जिसे मिटा नही पाती है,
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Simple yet beautiful 👍🏻👍🏻
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Thank you .
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Waah
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aabhar .
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इस कविता में ही एक खुशबू महसूस हो रही है। सुंदर ….
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बहुत धन्यवाद सविता 🌹🌹😊
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