कुछ गैर ऐसे मिले,
जो मुझे अपना बना गए।
कुछ अपने ऐसे निकले,
जो गैर का मतलब बता गए।
दोनो का शुक्रिया
दोनों जिंदगी जीना सीखा गए।

Unknown
कुछ गैर ऐसे मिले,
जो मुझे अपना बना गए।
कुछ अपने ऐसे निकले,
जो गैर का मतलब बता गए।
दोनो का शुक्रिया
दोनों जिंदगी जीना सीखा गए।

Unknown
उम्र चाहे जो भी हो मनचाहे रिश़्ते,
अपने आप हमउम्र हो जाते हैं।

Unknown
कभी कभी समझ नहीं आती ,
क्यों है ज़िंदगी इतनी उलझन भरी ?
जितनी सुलझाओ उतनी
ही उलझती जाती है .
रंग बिरंगे उलझे धागों की तरह
कहीं गाँठे कहीं उलझने हीं उलझने
और टूटने का डर …..
क्या यही है ज़िंदगी ?

कोई हुनर ,
कोई राज ,
कोई राह ,
कोई तो तरीका बताओ….
दिल टूटे भी न,
साथ छूटे भी न , कोई रूठे भी न ,
और ज़िन्दगी गुजर जाए।
Unknown
तहज़ीब के ख़िलाफ़ हुआ,
सच का बोलना..!!
अब झूठ ज़िन्दगी के ,
सलीक़े में आ गया…!!
– Unknown

कहते है –
जीत कर, फिर से हार जाना..
यही तो रवायत है, रिश्ता निभाने की…
पर जब किसी को सिर्फ़ जीतने की
आदत हो जाए .
झुकना नहीं सिर्फ़ झुकाना
ही नियम बन जाय……..
तब ?????
हारते और झुकते रहने
से अच्छा है –
अपने लिए खड़े होना सीखना ……

वक़्त बहुत कुछ दिखलाता है .
कभी ख़ुशियों की बरसात ,
कभी ग़मों की धूल भरी आँधी .
ख़ूबी तो तब है , जब
अपने ऊपर से …….
हर आँधी को बस गुज़र जाने दें
घास की तरह .
वृक्ष की तरह तने रहे तो
टूट भी सकते है .

Best I have ever read on Kashmir situation…
उम्र जन्नत में रह कर,
उसे उजाड़ने में गुज़ार दी,
और जिहाद बस इस बात का था,
की मरने के बाद जन्नत मिले…!!!

अक्सर मायूस ….उदास …..दिल
ज़िंदगी के रंगो से
छोटी छोटी ख़ुशियाँ ढूँढ ही लेता है .
जैसे
अंधेरे में रौशनी खोजती ये आँखे ,
अपने आप को ढाल
कुछ ना कुछ रौशनी खोज ही लेती है .

कहते हैं घर की चार दीवारों में रहो !
सीता, द्रौपदी,अहिल्या अपने घरों में
रहीं क्या सुरक्षित ?
पर कहलाईं सती, पवित्र अौर दिव्य ।
आज ना कृष्ण हैं ना राम उद्धार को ,
है मात्र अपमान अौर नसीहतें।
काश स्त्री सम्मान की नसीहतें सभी को दीं जाएँ ।
सीता का हरण उनकी कुटिया से रावण ने कामांध हो कर किया था।
द्रौपदी का चीर हरण परिवार जनों के बीच भरे दरबार में हुआ था। उनके सखा कृष्ण ने उनकी रक्षा की।
गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या से इन्द्र ने कामेच्छाग्रस्त हो, धोखे से संबंध उनके कुटिया में बनाया । उनके पति का रूप धारण कर छल-कपट से उनका स्त्रीत्व भंग किया। कुपित गौतम ऋषि से अपनी पत्नी को शिला में बदल दिया। बाद में भगवान राम ने उनका अपने पैरों से स्पर्श कर उद्धार किया।
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