जीवन का हिसाब
सुलझा ना सकी.
मेरे बीते पल
लौटा दो तो,
शायद सुलझ जाय
कुछ गाँठे.

Picture Courtsey Zatoichi
जीवन का हिसाब
सुलझा ना सकी.
मेरे बीते पल
लौटा दो तो,
शायद सुलझ जाय
कुछ गाँठे.

Picture Courtsey Zatoichi
रेशम के रेशमी शकुन अौ एहसास
में लिपटे रेशम कीट,
ककुन में अपने को
महफ़ूज़ मान
भूल जाते है
अपने क्षण भंगुर जीवन को .
वैसे हीं जैसे हम अपने
काली सफ़ेद ख़ंजन नयनों
में भरे रंगीन सपने में डूब
भूल जाते है
जीवन की नश्वरता को.

सिल्क धागा निकालने के लिए अंडाकार ककुन , जिसके अंदर जीवित सिल्क कीट होते है , उसे गर्म पानी में उबाला जाता है .
Cocoons are collected, which are single-shelled and oval in shape, and are then boiledto extract the silk yarn from it. The cocoons are boiled with the living larvae / silk worm still inside.
यूं तो जिंदगी में आवाज देने वाले,
ढेरों मिल जायेंगे …….
लेकिन बैठिए वहीं,जहां
अपनेपन का अहसास हो…..

Unknown
शाम की शाम
ढलती हँस रही है ,
ज़िंदगी गुज़रती ,
हँस रही है .
पर क्या है
जो अधूरा है ?
क्या तृष्णा है ?
दिल की बेचैनी
क्या खोज रही है ?

कभी आ भी जाना
बस वैसे ही जैसे
परिंदे आते है आंगन में
या अचानक आ जाता है
कोई झोंका ठंडी हवा का
जैसे कभी आती है सुगंध
पड़ोसी की रसोई से
आना जैसे बच्चा आ जाता
है बगीचे में गेंद लेने
या आती है गिलहरी पूरे
हक़ से मुंडेर पर
जब आओ तो दरवाजे
पर घंटी मत बजाना
पुकारना मुझे नाम लेकर
मुझसे समय लेकर भी मत आना
हाँ अपना समय साथ लाना
फिर दोनों समय को जोड़
बनाएंगे एक झूला
अतीत और भविष्य के बीच
उस झूले पर जब बतियाएंगे
तो शब्द वैसे ही उतरेंगे
जैसे कागज़ पर उतरते है
कविता बनके
और जब लौटोतो थोड़ा
मुझे ले जाना साथ
थोड़ा खुद को छोड़े जाना
फिर वापस आने के लिए
खुद को एक-दूसरे से पाने
के लिए.

गुलज़ार ~~
स्वभाव की सरलता भय नहीं
संस्कारो की देन है ……
जैसे समीर की सरलता ,
जल की शीतलता .
पर उनका रौद्र रूप
विध्वंस भी ला
सकता है .
दिलों दिमाग़ के जद्दो जहद में
कभी दिल जीतने लगता है
और कभी दिमाग़ .
समझ नहीं आता कहाँ से
छुप कर ये हमें
चलाते हैं….
पर यह तय है ये
कम ही साथ साथ दोस्ती निभाते है .
अक्सर ये हमें
बड़ा नचाते हैं.

मौन वह कहता है,
जो शब्द नहीं
दिल से जो दिया जाए
वह दिया नहीं जा सकता हाथों से ….

ख्वाहिशें कम हों,
तो आ जाती है नींद
पत्थरों पर भी,
वरना बहुत चुभता है,
मखमल का बिस्तर भी.

Unknown
अजनबी सी है ये जिंदगी,
और वक्त की तेज़ है रफ्तार.
रात इकाई,
नींद दहाई
ख्वाब सैंकडा,
दर्द हजार
फिर भी है जिँदगी मजेदार.

Unknown
You must be logged in to post a comment.