एक कवि और महान नेता को श्रद्धा सुमन !!

छोटे मन से कोई

बड़ा नहीं होता,

टूटे मन से कोई

खड़ा नहीं होता .

युगपुरूष अटल बिहारी बाजपेयी

ज़िंदगी के रंग- 89

एक टुकड़ा ज़िंदगी का

बानगी है पूरे जीवन के

जद्दोजहद का .

उठते – गिरते, हँसते-रोते

कभी पूरी , कभी स्लाइसों

में कटी ज़िंदगी

जीते हुए कट हीं जाती है .

इसलिए मन की बातें

और अरमानों के

पल भी जी लेने चाहिये.

ताकि अफ़सोस ना रहे

अधूरे हसरतों ….तमन्नाओं …. की.

ज़िंदगी के रंग – 88

ज़िंदगी के दो छोरों

को बाँधने की कोशिश

ना करना.

हमने इस कोशिश में

जाया किया है

सुनहरे पलों को.

और हाथ आया सिफ़र .

यह तो वह बहाव है .

जो अपना रास्ता

ख़ुद ही ढूँढ लेती है .

तमन्ना

तमन्ना हमसे अक्सर पूछती है-

“मैं कब पूरी होऊंगी..?

हम भी हँस कर जवाब दे देते हैं,

जो पूरी हो जाये ..

वो तमन्ना ही क्या..??

Unknown

एहसास

कई बार दिल वह देख लेता हैं

जो आँखें नहीं देख पातीं .

प्यार के एहसास का जादू

कभी ना कभी सभी के दिलो

को छू जाता है.

भले हीं इस प्यार का रंग

सब की नज़र में अलग- अलग हो .

इस भीड़ भरी दुनिया में,

उलझनों , परेशानियों , ख़ुशी-ग़म

रोशनी-अंधेरे में अक्सर

प्यार की रौशनी हीं राह सुझातीं हैं …..

आश्रु भरे नयन

धीरे धीरे , आहिस्ता – आहिस्ता

सारे पल बीत गये,

समय को पकड़ने की

कोशिश मेंरह गईं रिक्त मुट्ठी …..

और कुछ ख़्वाब, यादें और ख़्याल .

विवश कुमहलाया चेहरा

और आश्रु भरे नयन ……

यादें

चाहो या ना

चाहो ये यादें

साये की तरह

लिपटी रहती है .

बग़ैर इजाज़त तुम्हें

याद करने की गुस्तखियों के

लिए तहे दिल माफ़ी की गुज़ारिश है.

 

 

 

 

.

ज़िंदगी के रंग – 77

जीना सीखते सीखते

बरसो लग जाते है .

और जीना सीखते समझते

जाने का वक़्त आ जाता है.

फिर भी कहने वाले कहते है –

” तुम्हें जीना नहीं आया ‘

 

 

फटे यथार्थ के टुकडे

चोट खाया मर्म,

कुछ कड़वे रिश्ते

तीखी यादें अतीत के शून्य

में कहीं विलीन हो जातें है .

उन्हें चिर निद्रा में डूबा रहने देना ही ठीक है .

वापस खिंचने की कोशिश में हाथ आते है मात्र फटे यथार्थ के टुकडे

 

.

पल

मैं गुजरे हुए

कल को तलाशता रही दिनभर…!

और शाम होते-होते

मेरा आज भी चला गया…!!

 

Unknown

 

Picture Courtsey Zatoichi