कैसे तय करे कि हम वोट किसे दें?

व्यंग Satire

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चुनाव का मौसम आते राजनीति

गलियरों में एक खेल ज़ोरों पर है।

एक दूसरे पर ताने कसते, व्यंग,

टीकाटिप्पणी करते…..

धर्म, पार्टी, राजनीतिक आधार पर

तंज कसते, छिंटाकशी करते बड़े लोगों का खेल.

जो बच्चों जैसे लग रहे हैं.

जनता भी बिना सोचे समझे

इस खेल को खेलने लगी है.

अब इंतज़ार यह है कि ये लोग कब बड़े होंगे .

तब तो हम,

तय करेगे किहम वोट किसे दें !!!!

Odisha polls: BSP decide to give ticket a transgender candidate from Korei assembly

जियो और जीने दो !!!

हम सब ने रंग, धर्म, जेंडर, देश ,

अमीर-ग़रीब , भाषा, गोरा-काला

पोलिटिकल पार्टी और ना जाने

मानव की बनाई कितनी ….

कितनी आर्टिफ़िशल सीमा रेखाओं

में अपने आप को बाँध रखा है .

फूलों , पशुओं – पंछियों , तितलियों ..,,,

में तो ऐसा झगड़ा नहीं देखा .

इन सब के जीने का सिद्धांत तो बड़ा

सरल है – जीयो और जीने दो!!

ईश्वर की सर्वोत्तम कृति

होने का यह नतीजा क्यों ?

news in detail- https://www.gnsnews.co.in/odisha-polls-bsp-decide-to-give-ticket-a-transgender-candidate-from-korei-assembly/

चुनाव -व्यंग

Aim of Election – Elections enable voters to select leaders and to hold them accountable for their performance in office. … As a result, elections help to facilitate social and political integration. Finally, elections serve a self-actualizing purpose by confirming the worth and dignity of individual citizens as human beings.

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चुनाव क्या गज़ब का खेल है?
वैसे तो मालुम नहीं ये भगवान को कितना याद करते हैं ?पर हर पाँच साल पर धर्म, मंदिर-मस्जिद मुद्दा याद कराते हैं।

झगङे बढ़ जाते हैं, मामला वहीं का वहीं रह जाता है।

वैसे तो नहीं पता ये इंसानियत को कितना याद करते हैं?

पर हर पाँच साल पर रिजर्वेशन-आरक्षण का खेल खेलाते हैं।

कभी भारत- पाक भँजाते हैं।

छींटाकशी, टीका-टिप्पणी, आरोप- प्रत्यारोप, एक दूसरे की टाँग खिचाईं में मस्त,

अँग्रेज ‘ङिवाइङ ऐंङ रुल’ का गुरुमंत्र दे गये।

बरसों बीते, अरसे बीते …………

मुद्दा वही पुराना हिट है।

मजे की बात है पक्षी आज भी जाल में फँस जाते हैं,

काश कुछ ऐसे मुद्दे होते –

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, देश के उज्जवल भविष्य की बातें,

हमें यह लगता – अरे ! इस बार हम छले नहीं गये।

किन्नर /ट्रांसजेंडर Transgender

For only transgender candidate, election ‘a chance to gain respect’ Everybody makes fun of us….. we just need one chance, News- The Indian Express PUNENewsLine.  dated  Sat, Feb 18,2017)

किन्नर या ट्रांसजेंडर

प्रकृति में नर नारी के अलावा एक अन्य वर्ग भी है जो न तो पूरी तरह नर होता है और न नारी। जिसे लोग हिजड़ा या किन्नर या फिर ट्रांसजेंडर के नाम से संबोधित करते हैं।

महाकाव्य महाभारत में किन्नर

अर्जुन अौर उलुपि के पुत्र इरावन को किन्नरों के अराध्य देव माना जाता है। किवदन्ति है कि पांङवों को महाभारत विजय के लिये एक बलि की जरुरत थी। इरावन इसके लिये तैयार हो गया। पर बलि से पहले वह विवाह करना चाहता था। अतः कृष्ण ने मोहिनी नाम की नारी का रुप धारण कर इरावन से एक रात का विवाह रचाया था। विल्लुपुरम मंदिर में अप्रैल और मई में हर साल किन्नर १८ दिन का धार्मिक त्योहार मनाते हैं। त्योहार के दौरान,भगवान कृष्ण और इरावन की शादी व इरावन के बलिदान की कहानी दोहराई जाती है ।
शिखंडी महाभारत युद्ध में
महाभारत में अर्जुन ने एक साल के लिये किन्नर का रुप धारण किया था और अपना नाम वृहनल्ला रख लिया था. इसी तरह शिखंडी हिंदू महाकाव्य में एक किन्नर चरित्र है । जो पांचाल के राजा द्रुपद का पुत्र अौर पांचाली व धृष्टद्युम्न का भाई था। शिखंडी ने पांडवों के पक्ष में कुरुक्षेत्र युद्ध में हिस्सा लिया तथा भीष्म की मृत्यु का कारण बना।

 

रामायण में किन्नर-

रामायण के कुछ संस्करणों में लिखा है, जब राम अपने 14 वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या छोड़ने लगे हैं। तब अपने साथ आ रही प्रजा को वापस अयोध्या लौटने कहते हैं।

पर 14 साल के बाद लौटने पर किन्नरों को वहीं अपना इंतजार करते पाया। उनकी भक्ति से राम ने खुश हो किन्नरों को वरदान दिया कि उनका आशीर्वाद हमेशा फलित होगा। तब से बच्चे के जन्म और शादी जैसे शुभ अवसरों के दौरान वे लोगों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं ।

ग्रह अौर टोटके

बुध को नपुंसक ग्रह माना गया है। अतः कुंडली में जब बुध कमजोर हो तो उस समय किसी किन्नर को हरे रंग की चूड़ियां व साडी दान करनी चाहिए। इससे लाभ होता है।

मान्यता है, किन्नरों की दुआएं किसी भी व्यक्ति के बुरे वक्त को दूर कर सकती हैं। और यदि धन का लाभ चाहते है तो किसी किन्नर से एक सिक्का लेकर अपने पर्स में रखे।

इन्हें मंगल मुखी कहते है क्योंकि ये केवल मांगलिक कार्यो में ही हिस्सा लेते हैं मातम में नहीं।

इन किन्नरों या ट्रांसजेन्डरो को समाज में बराबरी का दर्जा नहीँ दिया जाता हैं। जबकि हमारे महाकाव्यों में इनकी विषद चर्चा है। ये शादियों, बच्चे के जन्म में नाच गाने, भीख मांगने और देहव्यापार से ही आजीविका चलाते हैं।

ऐसे में इन में से कुछ को केरल में माडलिंग का अवसर प्रदान किया गया हैं। ये किन्नर मॉडल हैं – माया मेनन और गोवरी सावित्री। उन्हें मॉडलिंग का कोई अनुभव नहीं है। उनका कहना है कि सामाजिक संस्था क़रीला के ज़रिए इन्हें यह अवसर मिला। क़रीला केरल में एलजीबीटी समुदाय के लिए काम करने वाली एक संस्था है।

Source: मॉडेल बने किन्नर /ट्रांसजेंडर ( जैसे अर्जुन बने थे वृहनल्ला )