मर्मांतक पीड़ा….बेबसी…

मर्मांतक पीड़ा, बेबसी

यह कैसा नववर्ष… नव भारत है?

इतनी बे-रहमी…. क्रूरता ये लाते कहाँ से है?

किसी की दर्द भरी चीखें क्यों सुन पाते नहीं हैं?

जो इस ख़बर को पढ़ कानों में गूँजती है।

क्यों इंसान बन कुछ सोंच पाते नहीं?

बाद में अल्‍पवयस्‍क, दिमाग़ी अस्वस्थता

जैसे आइडिया सोचनें में माहिरी दिखाते हैं।

कैमरों के शहर अपराध के सबूत दिखाते हैं।

समय पर कैमरे देख अपराध रोक क्यों नहीं पाते?

देखनेवाले मूक दर्शक क्यों बन जातें है?

चलो फिर मोमबत्तियाँ जलातें हैं।

अगले क्रूर अपराध का शिकार कौन, अटकलें लगातें हैं।

यह भूल, कितनी मर्मांतक पीड़ा, बेबसी झेली होगी उसने?

NEWS – A 20-year old woman was hit n died.

Her naked body was dragged around for

kilometres.

Delhi’s Sultanpuri, January 1, 2023, police said.

Woman dies after being dragged for 4 kms by car in Delhi. https://www.thehindu.com/news/national/woman-dies-after-being-dragged-for-4-kms-by-car-in-delhi/article66328009.ece/amp/

लम्हा लम्हा

आख़िर क्या वजह थी

वक्त का संगीत

यह दुनिया, यह ज़िंदगी!

नये सफ़र

अकेलापन

जश्न-ए-चराग

अपना पीछा करते करते

अपना पीछा करते करते,

मुलाक़ात हुई अपनी परछाईं-ए-नक़्श से।

मिले दरिया के बहते पानी में अपने अक्स से।

मिले आईने में जाने पहचाने अजनबी शख़्स से।

मुस्कुरा कर कहा आईने ने –

बड़ी मुद्दतों के बाद मिली हो अपने आप से।

वक्त तो लगेगा जानने में, पहचानने में।

उलझे जीवन रक़्स में,

बिंब-प्रतिबिंब देख बे-‘अक्स

हो खो ना जाए यह शख़्स।

अर्थ – रक़्स – नृत्य

नीम-बाज़

कमल की अधखिली कलियाँ हों नीम-बाज़।

या नींद में डूबी आँखें नर्गिस-ए-नीम-बाज।

ख़ूबसूरती और ख़ुशबू से दोनों की कर देतीं है

दिल ख़ुश मिज़ाज।

अर्थ

*नर्गिस-ए-नीम-बाज -half opened eye (like narcissus flower)

* नीमबाज़ अध-खुला, आधा खुला आधा बंद, अधखुली,नशीली, मदहोश, मंत्रमुग्ध (प्रायः पलक, पुत्ली, आँख, कली आदि की विशेषता के लिए प्रयोग )