Tag: मुस्कान
जागता रहा चाँद
जागता रहा चाँद सारी रात साथ हमारे.
पूछा हमने – सोने क्यों नहीं जाते?
कहा उसने- जल्दी हीं ढल जाऊँगा.
अभी तो साथ निभाने दो.
फिर सवाल किया चाँद ने –
क्या तपते, रौशन सूरज के साथ ऐसे नज़रें मिला सकोगी?
अपने दर्द-ए-दिल औ राज बाँट सकोगी?
आधा चाँद ने अपनी आधी औ तिरछी मुस्कान के साथ
शीतल चाँदनी छिटका कर कहा -फ़िक्र ना करो,
रात के हमराही हैं हमदोनों.
कितनों के….कितनी हीं जागती रातों का राज़दार हूँ मैं.
आँसू अौ मुस्कान
सुनने वाले के लिये जो सिर्फ कहानियाँ हैं,
उनमें कितनी अौर कहानियाँ,
आँसू अौ मुस्कान छुपे हैं,
सुनाने वाला हीं जान सकता है।
आँसू अौर मुस्कान
कुछ हँस कर, कुछ रो कर झेलते हैं।
दुःख सहने का अपना- अपना तरीका होता है।
क्या अच्छा हो, गर आँखों में आँसू पर होंठों पर मुस्कान हो।
Image from internet.

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