अपने लिखे शब्दों को वाह वाही
देने वालों को देख कर समझ आया –
ये भी जिंदगी के उस दौर से गुजरे है।
जहाँ यह रंग दिखाती है।
अपने लिखे शब्दों को वाह वाही
देने वालों को देख कर समझ आया –
ये भी जिंदगी के उस दौर से गुजरे है।
जहाँ यह रंग दिखाती है।
Forgive but do not forget,
or you will be hurt again.
Forgiving changes the perspectives.
Forgetting loses the lesson.”
― Paulo Coelho
Pearls are formed inside the shell of certain mollusks as a defence mechanism against a potentially threatening irritant such as sand particles or parasite inside the shell. The mollusk creates a pearl sac to seal off the irritation.
हम बचतें हैं दुःखों -तकलिफों से
अौर
समुद्र के सीप को देखो
गर रेत का कण चला जाये,
उसके अंदर
वह उसे भी आबदार मोती बना ङालता है !
सीप के अंदर अगर रेत कण चला जाता हैं। तब इसके अंदर रहने वाला मॉलस्क कीङे को अपनी त्वचा पर रेत से तकलीफ होने लगती है। इससे बचने के लिये, इस रेत के कण पर वह अपनी त्वचा से निकले चिकने तरल पदार्थ की परतें चढ़ाने लगता है अौर यही चमकदार बन जाता है।
रंगीन रंगों ने सिखाया,
रंगे जिंदगी !!!!
खूबसूरत तस्वीर तभी बनती हैं,
जब मिलते- बिखरते हैं कुछ रंग।
अौर यही कहानी है तस्वीरे जिंदगी की ……….
If you find
all your roads
and paths blocked,
He will show you
a secret way that no one knows
Rumi

ढेर सारी मीठी मीठी हँसी
छलक छलक कर बिखर गई।
बरसाती, उफनती नदी सी बह कर सभी को
अपने साथ गीली करती भिगो गई।
कांटों भरी, संघर्ष शिखर लगते हालातों में
हौसले , ताकत, सबक दे जाती हैं
बच्चों की यह मासूमियत ।
इसलिये बचपना बचाये रखना !!!!!
अक्सर देखा है ,गिरने वाले को उठाएँ या नहीं?
यह तय होता है, गिरनेवाले की अौकात पर ………
कङवी या मीठी-मृदु,
सबकी जिंदगी है एक कहानी।
कुछ हँसाती, कुछ रुलाती,
रसीली या निरस
जहाँ
अपनों को अपना बनाये रखने की कोशिश में
पराये तो अपने हो जाते हैं,
पर कुछ अपने अौर कुछ सपने हीं खो जाते हैं।
News 31.7.2017 –Daily News & Analysis Mint office begins sale of commemorative coins on Gandhi,
Sale of commemorative coins on Gandhi, Komagata Maru incident begins
The Komagata Maru incident dates back to May 23, 1914 when the ship carrying 376 passengers, majority of whom were Sikhs, Muslims and Hindus were denied entry into Canada after an immigration dispute. Some of the passengers were killed in protests on their return to India.
The Government Mint, Mumbai, has started sale of commemorative coins of Mahatma Gandhi and the Komagata Maru incident.
(यह भारतीयों की एक मार्मिक कहानी है। “कोमगाटा मारू” जापानी जहाज़ में 376 भारतीय यात्री सवार थे। यह जहाज़ 4 अप्रैल 1914 को निकला। ये भारतीय कनाडा सरकार की इजाज़त से वहाँ पहुंचे। पर उन्हे बैरंग लौटा दिया गया। जब यह वापस भारत पहुँचा तब यहाँ अँग्रजों ने गोलियोँ से उनका स्वागत किया।
सरकारी टकसाल, मुंबई ने महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका और कॉमगेट मारू घटना के शताब्दी को याद करने के लिए स्मारक सिक्के की बिक्री शुरू कर दी है। )
सुदूर देशों में ज्ञान बाँटने और व्यवसाय करने,
हम जाते रहें है युगों से।
आज हम फिर, अच्छे जीवन की कामना, गुलामी और
संभावित विश्वयुद्ध के भय से भयभीत।
निकल पड़े अनंत- असीम सागर में,
कॉमगेट मारू जहाज़ पर सवार हो।
चालीस दिनों की कठिन यात्रा से थके हारे,
हम पहुँचे सागर पार अपने मित्र देश।
पर, पनाह नहीं मिला।
वापस लौट पड़े भारतभूमि,
पाँच महीने के आवागमन के बाद
कुछ मित्रो को बीमारी और अथक यात्रा में गवां।
टूटे दिल और कमजोर काया के साथ लौट,
जब सागर से दिखी अपनी मातृभूमि।
दिल में राहत और आँखों में आँसू भर आए।
अश्रु – धूमिल नेत्रों से निहारते रहे पास आती जन्मभूमि – मातृभूमि।
तभी ………………….
गोलियों से स्वागत हुआ हमारा। कुछ बचे कुछ मारे गए।
अंग्रेजों ने देशद्रोही और प्रवासी का ठप्पा लगा ,
अपने हीं देश आने पर, भेज दिया कारागार।
स्वदेश वापसी का यह इनाम क्यों?
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