शुभ विश्व हिन्दी दिवस: 10 जनवरी Happy World Hindi Day :10 January

विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है।

चोट का दर्द

कहते हैं चोट का दर्द टीसता है

सर्द मौसम में.

पर सच यह है कि

सर्द मौसम की गुनगुनी धूप,

बरसाती सूरज की लुकाछिपी की गरमाहट

या जेठ की तपती गर्मी ओढ़ने पर भी

कुछ दर्द बेचैन कर जाती हैं.

दर्द को लफ़्ज़ों में ढाल कर

कभी कभी ही राहत मिलती है.

आदत

इक अजीब सी आदत जाती नहीं.

जब भी परेशां होतें हैं-

तुमसे बातें करने की हसरत जागती हैं।

पर मिलोगे कहाँ?

रास्ता और पता मालूम नहीं.

ज़िंदगी के रंग – 195

सुनना ना पड़े शिकवे हवाओं को इसलिये,

क़ैद कर दिया चराग-ए-लौ को काँच के ताबूत…

…..कांच की चिमनी में.

जैसे रुह  जिस्म के क़फ़स… पिंजरे में बंदी है,  

दुनिया के बंदिशों में। 

 

Table Brass Akhand diya

 

अर्थ- क़फ़स= पिंजरा, शरीर,जाली

 

Happy New Year 2020!!

On the last day of year, Just want to say thanks to all the beautiful people. You made me smile . Wish you happy and Fabulously prosperous New Year!

सतह का तनाव

पानी के क़तरे में चींटी को देखा क़ैद,

सतह तनाव को ना तोड़ पाने से,

एक बड़ी सी जल बूँद के अंदर.

ऐसे हीं क़ैद हो जातें है,

हम भी यादों के क़ैद में.

लगता है, दुनिया में हो कर भी नहीं हैं

और कभी नहीं तोड़ पाएँगे

इस कमज़ोर पारदर्शी बुलबुले के क़ैद को….

सतह तनाव- surface tension

ज़िंदगी के रंग – 194

ज़िंदगी कट गई भागते दौड़ते.

थोड़ा रुककर कर,

ठहर कर देखा – चहचहातीं चिड़ियों को,

ठंड में रिमझिम बरसती बूँदे,

हवा में घुली गुलाबी ठण्ड……

खुशियाँ तो अपने आस-पास हीं बिखरीं हैं,

नज़रिया और महसूस करने के लिए फ़ुर्सत….

वक़्त चाहिए.

ज़िंदगी के रंग – 197

यह जीवन एक यात्रा है, निरंतर बहते जल प्रवाह सा. हर किसी की अपनी यात्रा होती और अपने-अपने नियम. इस सफ़र में कुछ लोग साथ आते हैं, साथ चलते हैं. कुछ साथ छोड़ जातें हैं और कुछ जीवन भर साथ निभाते हैं. कुछ चाल चलते हैं. कुछ शह और मात दे जाते हैं कुछ अपनेपन से, कुछ खेल भावना से और कुछ राग, ईर्ष्या व द्वेष से खेलते हैं, शतरंज के खेल की तरह. पर यह भूल जातें हैं कि इस खेल में चले क़दम वापस नहीं होते. और हर क़दम होता है आईना उनके व्यक्तित्व का.

Painting courtesy- Lily Sahay

ज़िंदगी के रंग – 196

बहते बहते उम्र के बहाव में,

ज़िंदगी के बदलते पड़ाव में,

हर किसी को ज़िंदगी में,

उन्हीं कहानियों का सामना करना पड़ता है,

जो सनातन काल से शाश्वत है.

ज़िंदगी क्षण भंगुर है –

यह जानते हुए भी उलझ जातें हैं माया मोह में.

और जब यह मायावी स्वप्न टूटता है,

तब ख़्याल आता है – मृत्यु तो सब की आती है.

पर जीवन जीना कितने लोगों को आता है?

Cloud and Sunlight

This is how I would die into the love I have for you: as pieces of cloud dissolve in sunlight.

Rumi ❤️

Image courtesy- Aneesh