विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है।

विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है।


सुनना ना पड़े शिकवे हवाओं को इसलिये,
क़ैद कर दिया चराग-ए-लौ को काँच के ताबूत…
…..कांच की चिमनी में.
जैसे रुह जिस्म के क़फ़स… पिंजरे में बंदी है,
दुनिया के बंदिशों में।

अर्थ- क़फ़स= पिंजरा, शरीर,जाली
On the last day of year, Just want to say thanks to all the beautiful people. You made me smile . Wish you happy and Fabulously prosperous New Year!


सतह तनाव- surface tension
ज़िंदगी कट गई भागते दौड़ते.
थोड़ा रुककर कर,
ठहर कर देखा – चहचहातीं चिड़ियों को,
ठंड में रिमझिम बरसती बूँदे,
हवा में घुली गुलाबी ठण्ड……
खुशियाँ तो अपने आस-पास हीं बिखरीं हैं,
नज़रिया और महसूस करने के लिए फ़ुर्सत….
वक़्त चाहिए.

यह जीवन एक यात्रा है, निरंतर बहते जल प्रवाह सा. हर किसी की अपनी यात्रा होती और अपने-अपने नियम. इस सफ़र में कुछ लोग साथ आते हैं, साथ चलते हैं. कुछ साथ छोड़ जातें हैं और कुछ जीवन भर साथ निभाते हैं. कुछ चाल चलते हैं. कुछ शह और मात दे जाते हैं कुछ अपनेपन से, कुछ खेल भावना से और कुछ राग, ईर्ष्या व द्वेष से खेलते हैं, शतरंज के खेल की तरह. पर यह भूल जातें हैं कि इस खेल में चले क़दम वापस नहीं होते. और हर क़दम होता है आईना उनके व्यक्तित्व का.

बहते बहते उम्र के बहाव में,
ज़िंदगी के बदलते पड़ाव में,
हर किसी को ज़िंदगी में,
उन्हीं कहानियों का सामना करना पड़ता है,
जो सनातन काल से शाश्वत है.
ज़िंदगी क्षण भंगुर है –
यह जानते हुए भी उलझ जातें हैं माया मोह में.
और जब यह मायावी स्वप्न टूटता है,
तब ख़्याल आता है – मृत्यु तो सब की आती है.
पर जीवन जीना कितने लोगों को आता है?


Rumi ❤️
Image courtesy- Aneesh
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