इम्तिहान
ज़िंदगी क्या तुझे
ख़बर है?
कितनी बार टूट कर
यहाँ पहुँचें है?
तू बस परखते रह,
नए-नए इम्तिहान
लेती जा।
इम्तिहान
ज़िंदगी क्या तुझे
ख़बर है?
कितनी बार टूट कर
यहाँ पहुँचें है?
तू बस परखते रह,
नए-नए इम्तिहान
लेती जा।

ज़िंदगी की किताब
ज़िंदगी के किताब
के पुराने पन्ने
कब तक है पढ़ना?
बीते पलों को
बीत जाने दो।
अतीत को
अतीत में रहने दो।
ज़िंदगी में आगे बढ़ो।
नए पन्नों पर कुछ
नया अफ़साना लिखो।

ज़िंदगी की राहें
मज़बूत दिखने वालों
की सच्चाई यह होती है,
कि वे कई बार टूट
कर बने होते हैं।
ज़िंदगी की राहों पर,
वे अकेला चलना
सीख चुके होतें हैं।

कोर्स
ना प्यार सीखने का
कोर्स होता है ।
ना दर्द देने या
नफ़रत करने का।
यह तो ज़िंदगी सीखती है,
और दिल सीखता है।

गीली पलकों पर
आँसुओं के चमकते
सितारे देख
आसमान के टिमटिमाते
सितारों ने झुक कर पूछा –
क्या जमीं पर नयनों से
सितारे बोना है?
क्यों है, मायूस चेहरा
और आँखों में आँसू ?
इनसे कुछ मिलेगा क्या?
नहीं ना?
अब ज़रा मुस्कुरा कर जी लो।
मान कर जियो कि
तुम्हारे पास मुस्कुरा कर
जीने के अलावा रास्ता नहीं।
फिर देखो,
ज़िंदगी, अँधेरा दूर कर
कैसे जलाती हैं
ख़ुशियों के चिराग़ ।

कहते हैं,
अपने दिल के सुकून
के लिए लोगों को
माफ़ करना अच्छा है।
चाहे वे माफ़ी
माँगे या ना माँगे।
पर ऐसी माफ़ियों से
रिश्ते में कुछ
घटने लगता है –
शायद, विश्वास,
प्यार और अपनापन !!
दिवाली की काली अमावस रात, काजल बनाना शुभ माना जाता है। मान्यता है, इस काजल को लगाने से बुरी नजर और घर के विध्न-बाधाएँ दूर होती हैं।


Happy Diwali to all of you !!!
छोटी दिवाली को काली चतुर्दशी या नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन मृत्यु के देवता यम के लिए दीपक जलाते हैं। सोने से पहले, देर रात घर से बाहर सरसों तेल का एक पुराना दीप या आटें का दीप यम की अर्पित करते हुए जलाया जाता है। ताकि अकाल मृत्यु और परेशनियाँ घर के बाहर रहें। कहते हैं, इस इस दीप को जला कर लौटे समय पलट कर नहीं देखना चाहिए।


आज छोटी दिवाली है। जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहते हैं। सौंदर्य हासिल करने के लिए दिवाली से एक दिन पहले, रूप चतुर्दशी मनाया जाता है। इस दिन ख़ुशबूदार तेल और उबटन लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है।
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