ज़िद

चाहतों से और ,

चाहते रहने से ,

ना मुक़ाम मिलते है .

ना चाहतें पूरी होती है .

मंज़िल माक़ूल पाने के लिए

चलते रहने की ज़िद

भी ज़रूरी है .

शौक़ीन

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को…

दूध से कहीं ज्यादा देखे है शौक़ीन चाय के…!!!

Unknown

Google doodle honours Mrinalini Sarabhai on her 100 birth anniversary

रंजिश

आज हीं कहीं यह पढ़ा और  सलाह कुछ अधूरी सी लगी इसलिए कुछ पंक्तियाँ जोड़ दी-

लम्हे फुर्सत के आएं तो, रंजिशें भुला देना दोस्तों,

किसी को नहीं खबर कि सांसों की मोहलत कहाँ तक है ॥

नई पंक्तियाँ

अच्छा हो रंजिशे पैदा करनेवाली आदतों को भुला देना ,

किसी को पता नहीं ये आदतें कहाँ तक चुभन पहुँचाएगी .

ना रंजिशे होंगी ना भुलाने की ज़रूरत .

ज़िंदगी और साँसों के मोहलत की गिनती की भी नहीं ज़रूरत.

थक कर ना बैठ

Unknown

Isreal stricks back against Syrian targets and threatens ‘storm’ on Iran after Golan Heights attack

नज़रें उठाना और गिराना

ढेरों बातें और यादें बटोरे

गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे

इंतज़ार में,  राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..

उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना

सारे ल़फ्ज ….अल्‍फाज़ चुरा ले गया।

Conquer your self

Once you conquer your selfish self,
all your darkness will change to light.

 

 

Rumi ❤ ❤