Category: The Bard’s Apprentice!
ख्याल अपना-अपना
एक हीं सागर को देख,
कितने अलग-अलग ख्याल आते हैं।
जब सागर के अथाह जल राशि
में झाँका ……….
उसमें किसी को बस अपनी परछांई दिखी।
किसी को लगा – बङा खारा यह समुंदर है।
तभी पास खङे परिचित वृद्ध सज्जन नें ,
समुद्र को नमन किया
अौर कहा –
ये तो लक्ष्मी के उत्पति दाता हैं।
किवदंति ( Mythology )
दैत्य, असुर तथा दानव अति प्रबल हो उठे। तब उन पर विजय पाने के लिये विष्णु जी के सुझाव पर क्षीर सागर मथंन कर उससे अमृत निकाला गया।
मन्दराचल पर्वत को मथनी तथा वासुकी नाग को नेती बनाया गया। स्वयं भगवान श्री विष्णु कच्छप अवतार लेकर मन्दराचल पर्वत को अपने पीठ पर रखकर उसका आधार बने। समुद्र मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला।महादेव जी उस विष को पी लिया किन्तु उसे कण्ठ से नीचे नहीं उतरने दिया। उस कालकूट विष के प्रभाव से शिव जी का कण्ठ नीला पड़ गया। इसीलिये महादेव जी को नीलकण्ठ कहते हैं। उनकी हथेली से थोड़ा सा विष पृथ्वी पर टपक गया था जिसे साँप, बिच्छू आदि विषैले जन्तुओं ने ग्रहण कर लिया।
इसके पश्चात् फिर से समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी निकलीं। साथ हीं कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा , ऐरावत हाथी, कौस्तुभमणि, कल्पवृक्ष , रम्भा नामक अप्सरा , वारुणी , चन्द्रमा, पारिजात वृक्ष, शंख निकले और अन्त में धन्वन्तरि वैद्य, अमृत का घट लेकर प्रकट हुये।
समय मौन है !
समय गूंगा नहीं
बस मौन है,
वक्त , वक्त पर बताता है,
किसका वक्त है
अौर
किसका कौन है!
Unknown
समय का गुल्लक
बरसों से बचा बचाकर समय के पल इकट्ठे किए थे।
उन्हे मन में जोड़कर कई दिन भी बना लिए
और सोचा था जब समय आएगा ……
तब दिल खोलकर इन पलों को खर्च करूँगी,
घूमूंगी, जियूँगी , जो जी चाहेगा वही करूँगी…
आज मन पक्का करके तोड़ा उन
पलों के गुल्लक, तब पता चला ..
जो बीत गया वह बीत गया .
बीता “समय” वर्तमान में नहीं चलता…

Unknown
मुस्कुराहटें
मुस्कुराहटें बाँटते-बाँटतें ,
यह तो समझ आ गया- यह नफे का सौदा है……
सब सूद समेत वापस मिल जाता है
बकाया- उधार नहीं रहता ।
खुशियाँ और ख्वाहिशें
छोटी छोटी खुशियाँ ही तो
जीने का सहारा बनती है ।
ख्वाहिशों का क्या वो तो
पल पल बदलती है ।

Anonymous
एक प्रश्न
कहते हैं –
ज्ञान इंसान को बेहतर बनाता है।
दर्द गायन को तराशती है।
पीङा आध्यात्मिकता….वैराग उत्पन्न करती है,
वेदना साहित्यकार को निखारती है,
व्यथा – कष्ट जीवन के नज़रिये को,
दंड-यंत्रणा भूल करने वालों को सुधारता हैं
अयोग्य राजनीतिज्ञ को क्या सुधारता है?
वर्तमान
भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है इसका भय अौर चिन्ता,
भूत काल की यादें, दुख ….अफसोस ….पछतावा
क्या कुछ बदल सकता है ?
फिर क्यों नहीं चैन से साँस लिया जाय
अौर वर्तमान में …..
जिया जाये ? ?
वर्तमान
भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है यह भय
भूत काल का दुख ….अफसोस ….पछतावा
क्या कुछ बदल सकता है ?
फिर क्यों नहीं वर्तमान में …..
जिया जाये ? ?

चाँद डूबा सूरज के लिए
चाँद डूबा सूरज के लिए,
सूरज ढल गया चाँद के लिए
रिश्तों में झुकना तो चलता है
पर कुछ एक दूसरे से बँधे होते है
पर नदी के दो किनारे जैसे .
एक रिश्ता ये भी निभा रहे है .
चाँद डूबा सूरज के लिए,
सूरज ढल गया चाँद के लिए

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