मुस्कुराहटें

मुस्कुराहटें बाँटते-बाँटतें ,

यह तो समझ आ गया- यह नफे का सौदा है……

सब सूद समेत वापस मिल जाता है

बकाया- उधार नहीं रहता ।

खुशियाँ और ख्वाहिशें

छोटी छोटी खुशियाँ ही तो

जीने का सहारा बनती है ।

ख्वाहिशों का क्या वो तो

पल पल बदलती है ।

 

 

 

Anonymous

एक प्रश्न

कहते हैं –

ज्ञान इंसान को बेहतर बनाता है।

दर्द  गायन को तराशती है।

पीङा आध्यात्मिकता….वैराग  उत्पन्न करती है,

वेदना साहित्यकार को निखारती है,

व्यथा – कष्ट जीवन के नज़रिये को,

दंड-यंत्रणा भूल करने वालों को सुधारता हैं

अयोग्य राजनीतिज्ञ को  क्या सुधारता है?

वर्तमान

भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है इसका भय अौर चिन्ता,

भूत काल की यादें, दुख ….अफसोस ….पछतावा

क्या कुछ बदल सकता है ?

फिर क्यों नहीं चैन से साँस लिया जाय

अौर वर्तमान में …..

जिया जाये ? ?

वर्तमान

भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है यह भय

भूत काल का दुख ….अफसोस ….पछतावा

क्या कुछ बदल सकता है ?

फिर क्यों नहीं वर्तमान में …..

जिया जाये ? ?

चाँद डूबा सूरज के लिए

चाँद डूबा सूरज के लिए,

सूरज ढल गया चाँद के लिए

रिश्तों में झुकना तो चलता है

पर कुछ एक दूसरे से बँधे होते है

पर नदी के दो किनारे जैसे .

एक रिश्ता ये भी निभा रहे है .

चाँद डूबा सूरज के लिए,

सूरज ढल गया चाँद के लिए

बिखरती खुशबू

बिखरती खुशबू को समेटने

की चाहत देख सुगंध ने कहा –

हमारी तो फितरत हीं है बिखरना

हवा के झोंकों के साथ।

तुमने बिखर कर देखा है कभी क्या ?

इस दर्द में  भी आनंद है।

 

जिंदगी के रंग -55

जिंदगी है या बोनसाई ?

मुट्ठी भर माटी में

लहलहाना है,

बढ़ना भी है।

हरे भी रहना है, खङे भी रहना है।

बङी अज़ीब सी है यह जिंदगी।

जिंदगी के रंग – 54

 

 रंग बदलती यह रंगीन  दुनिया…..

 रोज नये रंग दिखाती है .

कभी बेआवाज़-बेरंग दुआ,  रंग लाती हैं।

कभी कच्चे रंग के रिश्ते पक्के बन जाते हैं।

रंगों के संगत से बेरंग पानी भी रंग बदलाता है,

जैसे पल-पल रंग बदलते  लोग।

 

 

जीवन की होड़

जीवन की होड़ में एक बात समझ आई –

हर ओर ….सब लोगों  में योग्यतायें है .

इस दौड़ में शामिल होने

से अच्छा है प्रतिस्पर्धा

अपने आप से रखो ताकि .

सामना बराबर वाले से हो .